जैन साध्वी आर्यिका आर्षमति द्वारा श्रीमहावीरजी में धर्म प्रभावना प्रतिदिन हो रहे विधान एवं विभिन्न आयोजन

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जैन साध्वी आर्यिका आर्षमति द्वारा श्रीमहावीरजी में धर्म प्रभावना
प्रतिदिन हो रहे विधान एवं विभिन्न आयोजन

मुरैना/महावीरजी (मनोज जैन नायक) जैन साध्वी गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी द्वारा अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में धर्म प्रभावना की जा रही है । बताया जाता है कि जैनेश्वरी दीक्षा स्वीकार करने के पश्चात पूज्य गुरुमां का अतिशय क्षेत्र में प्रथमवार आगमन हुआ है । पूज्य माताजी द्वारा क्षेत्र पर निरंतर अपने प्रवचनों। विधानों एवं विभिन्न प्रकार के धार्मिक आयोजनों द्वारा निरंतर धर्म प्रभावना की जा रही है ।
परम पूज्य आर्यिका माताजी की संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी बहिन कंचन दीदी द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार परम पूज्य गुरुदेव छाणी परम्परा के षष्ठ पट्टाचार्य, सराकोद्धारक समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज की अंतिम दीक्षित शिष्या परम पूज्य गुरुमां गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी का लगभग दो सप्ताह पूर्व अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में मंगल आगमन हुआ था । आर्यिका अमोघमति माताजी, आर्यिका अर्पणमति माताजी, आर्यिका अंशमति माताजी भी संघस्थ रहकर आत्मकल्याण की भावना के साथ साधनारत हैं।
पूज्य गुरुमां आर्षमति माताजी ससंघ अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी के मुख्य मंदिर कटला वाली धर्मशाला में विराजमान हैं। माताजी के पास निरंतर भक्तों का आगमन बना हुआ है । प्रतिदिन विधानों का आयोजन हो रहा है । गुरुमां के भक्तगण प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र पर आकर बड़े बाबा के दरबार में पूज्य माताजी के सान्निध्य में विधानादि कर सातिशय पुण्य का अर्जन कर रहे हैं।
धौलपुर सहित अन्य नगरवासियों ने किए श्रीफल भेंट
विगत दिवस सकल जैन समाज धौलपुर ने श्रीमहावीरजी पहुंचकर पूज्य गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ के श्री चरणों में सामूहिक रूप से श्रीफल अर्पित कर धौलपुर आगमन हेतु निवेदन किया । धौलपुर समाज के अतिरिक्त लगभग एक दर्जन से अधिक शैलियों की समाज ने पूज्य आर्यिका संघ के श्री चरणों में श्रीफल अर्पित कर अपने अपने नगरों में आगमन हेतु निवेदन किया । सभी भक्तों की यही अभिलाषा थी कि आगामी भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव पूज्य गुरुमां के सानिध्य में ही मनाया जाए । धौलपुर समाज ने बड़े बाबा के दरबार में 48 दीपकों के साथ श्री 1008 भक्तामर पाठ का वाचन करते हुए महाअर्चना की ।
मुख्य मंदिर के नीचे वाले हॉल में बाहर से आए हुए श्रावकों द्वारा पूज्य आर्यिका संघ के सान्निध्य में विधान किया गया । विधान से पूर्व पुण्यार्जक परिवार द्वारा पूज्य गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी का पाद प्रक्षालन कर शास्त्रादि भेंट किए । इस अवसर पर गुरुमां आर्षमति माताजी ने अपने सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से सभी को धर्मवृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया ।

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