*जिस भूमि पर साक्षात तीर्थंकर भगवान का पंचकल्याणक होता है वह भूमि तीर्थ हो जाती है: आचार्य श्री अरिजीत सागर महाराज*
जागीरोड/ गुवाहाटी: पंचकल्याणक महोत्सव का दूसरा दिन गर्भ कल्याण के रूप में बनाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री अरिजीत सागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को इसकी महत्वता के बारे में बताते हुए कहा की तीर्थंकर प्रभु का ही गवं कल्याणक बनाया जाता है। क्योंकि पूर्वभवों में उन्होंने सोलहकारण भावना पढ़ कर तीर्थंकर मुक्ति का बंध किया था। उन्होंने कहा कि गर्व कल्याणक महोत्सव सबको गर्व के साथ स्वीकार करना चाहिए जिससे हमारा भी गर्भ कल्याणक हो। इस कार्यक्रम में काफी संख्या में पूर्वोत्तर से श्रद्धालु पहुंचे हैं। इससे पूर्व प्रथम दिन पंचकल्याण का प्रारंभ घट यात्रा के साथ हुआ। श्री दि. जैन समाज जागीरोड के तत्वाधान में आयोजित समारोह में आचार्य श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पंचकल्याणक में पंच महोत्सव होते हैं जन्म, गर्भ,तप,ज्ञान, मोक्ष कल्याण। यह पांचो महोत्सव उसी के होते हैं जो पांचो पापों से बचते हैं ऐसे जीव पंच प्रवर्तन पूर्ण करके पंचम गति के मेहमान बनते हैं। आपने कहा की जिस भूमि पर साक्षात तीर्थंकर भगवान का पंच कल्याणक होता है वह भूमि तीर्थ हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस भूमि का पुण्य उदय है, जो यहां पंचकल्याण की महा पूजन होने जा रही है। इससे पूर्व ध्वजारोहन झूमरमल-पन्नालाल गंगवाल (गुवाहाटी) सपरिवार को व मंडप का उद्घाटन राज कु.- पवन कु. सपरिवार को प्राप्त हुआ। तथा तीर्थंकर भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सुशील कुमार संगीता देवी गंगवाल (गुवाहाटी) को प्राप्त हुआ है।












