इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का देश दुनियां पर असर

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इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का देश दुनियां पर असर

मुरैना (मनोज जैन नायक) किसी भी वर्ष का फल नव संवत्सर के दशाधिकारियों की स्थिति, वर्ष के चार स्तंभ, वर्ष लग्न प्रवेश आदि पर से बहुत कुछ जाना जा सकता हैं।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस वर्ष विक्रम संवत्सर का नाम रौद्र नामक संवत्सर है। रौद्र वर्ष में अनेक देश के प्रमुख आपसी क्लेश, क्षोभ एवं सब प्राणियों में आपस में क्लेश रहता है। वर्षा मध्यम होती हैं। रौद्र के स्वामी चंद्र है, जिससे बीमारी ज्यादा होती है, अधिकारी गण परेशान रहते है । आषाढ़, श्रावण मास में अल्प वर्षा, भाद्र मास में अधिक वर्षा और बाढ से जन धन की हानि होती है ।
दशाधिकारियों के फल
वर्ष का राजा गुरु होने से समाज में लोग धर्म के कार्यो में रहेंगे, महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा, ब्राह्मण वर्ग यज्ञादि धर्म कार्यों में लगेंगे । विश्व शांति की दिशा में सार्थक प्रयास होंगे ।
मंत्री मंगल का फल- शासक एवं उच्च अधिकारी वर्ग अपनी हट धर्मी से प्रजा में अशांति, धरना, प्रदर्शन, अग्नि, हिंसा की घटनाएं बढ़ेगी ।
सस्येश गुरु का फल सस्येश गुरु होने से अन्न, रस, दूध आदि बहुत होगा ।
धान्येश बुध का फल सिंध एवं पंजाब को छोड़कर वर्षा अच्छी होगी, जिससे कृषि उत्पादन अच्छा होगा, गेहूं, जौ, चना, सरसों, राई, अरहर आदि का उत्पादन बहुत होगा।
मेघेश चंद्रमा होने से वर्षा अच्छी होने से तालाब, बांध आदि जल मग्न होगें । अनाज, फल,फूल उत्पादन अच्छा हो, उद्योग धंधों का विकास होगा।
रसेश शनि का फल रसेश शनि होने से रस पदार्थो की कमी होगी , संसद के वर्षा कालीन सत्र में नेतागण आरोप प्रत्यारोप में उलझेंगे।
नीरसेश गुरु का फल नीरसेश गुरु होने से हल्दी, चना,हरि सब्जी, हरि पीली दालें, पीले रंग की धातु और वस्तुओं में मंदी रहती हैं।
फलेस चन्द्र का फल वृक्षों में फल फूल की अच्छी उत्पत्ति होती है।
धनेश गुरु फल प्रजा धन लाभ कमाती है, व्यापारी वर्ग अच्छा लाभ कमाता है।
दुर्गेश चंद्र का फल यात्री यात्रा में असुरक्षित समझने से मन में भय रहेगा । गुंडा , चोर आदि के उपद्रव से जनता में असुरक्षा की भावना रहेगी।
गुड, शक्कर, दूध, घी आदि के व्यापार से अच्छा लाभ होगा ।
वर्ष के चार स्तंभ से फल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र का योग 4 प्रतिशत है अतः वर्षा कम होगी और अनियमित होगी । समयानुकूल वर्षा नहीं होने से भूजल स्तर गिरेगा, कृषि उपज की हानि होगी।
वैशाख शुक्ल प्रतिपदा को भरणी नक्षत्र का योग 22 प्रतिशत है । अतः घास कम उत्पन्न होगा, जिससे पशु पालक को कष्ट होगा। ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को मृगशिरा का योग 53 प्रतिशत होने से वायु स्तंभ सामान्य है । आंधी,तूफान आदि से जन धन की हानि होगी । आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को पुनर्वसु नक्षत्र का योग 43 प्रतिशत है । अतः अन्न स्तंभ मध्यम है, खाद्न के मूल्य बढ़ेंगे।
जैन ने कहा आर्षमान पर विचार के अनुसार अक्षय तृतीया को रोहिणी नक्षत्र का योग 14 प्रतिशत है। पौष अमावस्या को मूल नक्षत्र का योग 26 प्रतिशत है। श्रावण पूर्णिमा को श्रवण नक्षत्र का अभाव है। कार्तिक पूर्णिमा को कृतिका नक्षत्र 81 प्रतिशत है । कुल मिलाकर देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रति सतर्कता आवश्यक हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने अपनी ज्योतिषीय ग्रह गणना करते हुए भविष्यवाणी में कहा कि
देश की आंतरिक सुरक्षा इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि 19 मार्च को नव विक्रमसंवत् 2083 का आरंभ प्रातः 06:53 बजे पर चंद्रमान से हुआ तब मीन लग्न उदित था और लग्न में सूर्य, चन्द्र, शुक्र, शनि है, जिनका मंगल व राहु की अशुभ युति से दुर्द्वादश योग बना हुआ है । जो पश्चिमी देशों में हिंसा, अशांति, युद्ध से जन धन की हानि, किसी देश का सत्ता परिवर्तन, भारत में भी हिंसा, उपद्रव, धार्मिक कट्टरता के कारण वर्ग संघर्ष बढ़ेगा। विश्व के भूमंडल पर कुछ अकल्पित भय और विनाशकारी घटनाएं से विश्व में अशांति, युद्ध के बादल मडराते रहेंगे इस सब के बाबजूद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ेगा। सत्तारूढ़ पार्टी के विरुद्ध भी विपक्ष आक्रामक बना रहेगा फिर भी सत्तादल देश की अर्थ व्यवस्था और विकाश दर बढ़ाने में सफल रहेगा

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