हम गुरुओं को मानते हैं, लेकिन गुरुओं की नहीं मानते -जैनाचार्य निर्भयसागर
आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया
मुरैना (मनोज जैन नायक) हम गुरुओं की, साधु संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते । हम गुरुओं को मानते तो है, लेकिन गुरुओं की नहीं मानते । जबकि गुरुओं की वाणी के बिना हमारा उद्धार नहीं हो सकता । जैन दर्शन में गुरु आचार्यों को मोक्ष मार्ग का मार्गदर्शक मानकर सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु की आज्ञा की अवहेलना करना सम्यक ज्ञान और चारित्र की हानि है, जो आत्मा के विकास को रोकती है। इसके परिणामस्वरूप शिष्य की साधना निष्फल हो सकती है, आध्यात्मिक पतन हो सकता है और कर्मों के बंधन के कारण मोक्ष मार्ग में बाधा उत्पन्न हो सकती है। गुरु की आज्ञा न मानना या उनका अपमान करना गंभीर पाप कर्म है, जो जीव को नरक या नीच गति में ले जा सकता है। गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास की कमी से ज्ञान मार्ग में अंधकार छा जाता है और सही-गलत की पहचान खो जाती है। यदि शिष्य गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करता, तो कठोर तपस्या भी निरर्थक हो सकती है। गुरु के प्रति अविश्वास या अवज्ञा से सम्यक दर्शन प्रभावित होता है, जो मोक्ष की पहली सीढ़ी है। गुरु के अनुशासन में न रहने से शिष्य के चरित्र में दोष उत्पन्न हो सकते हैं। जैन दर्शन में गुरु आज्ञा को आत्म-कल्याण का मूल मंत्र माना गया है, और इसकी अवज्ञा को आत्म-विनाशकारी कहा गया है। मैं आज जो कुछ भी हूं अपने गुरु आचार्यश्री अभिनंदन सागर एवं आचार्यश्री विपुलसागरजी महाराज के आशीर्वाद से ही हूं । उक्त उद्गार जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित समारोह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।
आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया
सकल दिगंबर जैन समाज मुरैना द्वारा दिगम्बराचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज का 20वां आचार्य पदारोहण दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।
नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में मांगलिक क्रियाओं के साथ जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के पश्चात सभी गुरु भक्तों ने विश्व में सुख-समृद्धि व शांति की कामना के साथ भक्तिमय अनुष्ठान किए । श्री महावीर स्वामी विधान अनुष्ठान के दौरान अर्घ्य समर्पित किए गए । तत्पश्चात वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज का अष्टद्रव्यों से पूजन कर पूज्य आचार्यश्री की महिमा का गुणगान किया गया और जिनेंद्र देव से पूज्यश्री के दीर्घायु की कामना की गई ।
इस अवसर पर बालिका मंडल एवं महिला मंडल द्वारा सजाकर लाए गए अष्ट द्रव्यों से भक्ति भाव के साथ आचार्य श्री की पूजन संपन्न कराकर समस्त मुनिराजो को अर्घ्य समर्पित किए गए । आचार्य पदारोहण समारोह में गुरु भक्तों ने संगीत की मधुर धुन एवं जैन भक्तिमय भजनों पर नृत्य कर अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया । इस अवसर पर गुरु भक्तों द्वारा अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा पूज्य आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट किए गए ।धर्मसभा का संचालन करते हुए पूर्व प्राचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, संजय शास्त्री, अजय भैयाजी, नवनीत शास्त्री ने मंत्रोचारण के साथ अनुष्ठान की सभी क्रियाओं को संपन्न कराया ।
आज निकलेगी भगवान महावीर की भव्य रथयात्रा
भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पावन पर्व पर आज प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर मुरैना से भव्य रथ यात्रा निकलेगी । परम पूज्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज, मुनिश्री भूदत्तसागर जी महाराज मुनिश्री सुदत्तसागर महाराज, क्षुल्लकश्री चंद्रदत्तसागर, क्षुल्लकश्री यशोदत्तसागर महाराज भगवान महावीर स्वामी रथ यात्रा में साथ चलेंगे । भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाएगा । भव्य एवं विशाल शोभा यात्रा बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गो से भ्रमण करती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित होगी । बड़े जैन मंदिर जी में भगवान महावीर स्वामी को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर कलेशाभिषेक किए जायेंगे । तत्पश्चात सामूहिक वात्सल्य भोज का आयोजन होगा । रात्रि को भगवान महावीर स्वामी का बालक रूप में पालना झुलाया जाएगा ।

















