गुरु अपने शिष्यों के अंतरंग को शुद्ध एवं निर्मल कर आत्मज्ञानी बनाते हैं – आचार्य निर्भय सागर

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गुरु अपने शिष्यों के अंतरंग को शुद्ध एवं निर्मल कर आत्मज्ञानी बनाते हैं – आचार्य निर्भय सागर
कल भगवान महावीर रथ पर सवार होकर करेंगे नगर भ्रमण

मुरैना (मनोज जैन नायक) गुरु के बिना जीवन अंधकारमय होता है । सांसारिक जीवन में ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक जीवन में भी गुरु का अत्यधिक महत्व है । किसी ने ठीक ही कहा है “जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं” । आध्यात्मक गुरु केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि शिष्य के अंतरंग को शुद्ध एवं निर्मल कर उसे आत्मज्ञानी बनाता है। जैन दर्शन में गुरु को अज्ञान के अंधकार से निकालकर मोक्ष मार्ग दिखाने वाला, परम उपकारी और सच्चा मार्गदर्शक बताया गया है। वे निग्रंथ साधु होते हैं जो विषयों से विरक्त होकर ज्ञान, ध्यान और तप में लीन रहते हैं। गुरु ही आत्मा के स्वरूप को उजागर करते हैं, धर्म के संस्कार देते हैं, और कर्मों के बंधनों को तोड़कर भवसागर से पार उतारते हैं। गुरु ही अज्ञानी जीव को सम्यक दर्शन और सम्यक ज्ञान प्रदान कर आत्मा का बोध कराते हैं। गुरु ही बताते हैं कि सच्चा सुख सांसारिक भोगों में नहीं, बल्कि संयम और त्याग में है। गुरु के उपदेशो से ही शिष्य के मन में वैराग्य उत्पन्न होता है, जिससे वह तप-संयम अपनाकर कर्मों की निर्जरा करता है। गुरु ही शिष्य को हिंसक प्रवृत्तियों से बचाकर अहिंसा, संयम और तप के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं । निर्ग्रथ साधु ही सच्चे गुरु होते है जो मोक्ष मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करते है और अपने शिष्यों को संयम पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता, न ही गुरु के ऋण को कभी चुकाया जा सकता है । उक्त उद्गार जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ने पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री विपुलसागरजी महाराज के अवतरण दिवस समारोह में बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।
परम पूज्य वैज्ञानिक संत आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य में पूज्यश्री को आचार्य पद प्रदाता गुरुदेव पूज्य आचार्यश्री विपुलसागरजी महाराज के 93वें अवतरण दिवस के अवसर पर प्रातः श्री जी के अभिषेक, शांतिधारा के पश्चात आचार्य विधान का आयोजन किया गया । गुरुदेव आचार्यश्री विपुलसागरजी महाराज का अष्ट दृव्य से पूजन किया गया । कार्यक्रम से पूर्व गुरु भक्त परिवार महावीर प्रसाद विमलकुमार मुरैना को शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । साथ ही विनोदकुमार शोभितकुमार जैन मेरठ द्वारा आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया गया । मचासीन पूज्य गुरुदेव एवं मुनिश्री सुदत्त सागर महाराज, मुनिश्री, भूदत्तसागर जी महाराज का निर्मल जैन भंडारी परिवार द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया । श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा आचार्य संघ को शास्त्र भेंट किए गए । कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री सिहोनिया एवं प्रतिष्ठाचार्य अजय भैयाजी ज्ञापन तमूरा वाले दमोह द्वारा किया गया ।
भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर आज प्रातः प्रभात फेरी निकाली जाएगी । प्रभात फेरी बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गो से भ्रमण करती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंचेगी । तत्पश्चात परम पूज्य गुरुदेव वैज्ञानिक संत आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस मनाया जाएगा । शाम को इंद्र दरबार सजेगा और माता के सोलह स्वप्न दिखाए जाएंगे । कल 30 मार्च को प्रातः आचार्यश्री के ससंघ सान्निध्य में विशाल एवं भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी ।

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