दिगम्बर मुनि प्रणम्य सागर महाराज के सानिध्य में पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव 15 फरवरी से बोलखेड़ा में

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दिगम्बर मुनि प्रणम्य सागर महाराज के सानिध्य में पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव 15 फरवरी से बोलखेड़ा में
वर्धमान पंचबालयती तीर्थ ग्राम बोल खेड़ा में समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अर्हम योग प्रणेता मुनि प्रणम्य सागर महाराज ससंघ सानिध्य में आगामी 15 फरवरी से 20 फरवरी तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन होगा।
ब्रह्मचारी गोकुल राम जैन ने अवगत कराया की अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित ग्राम बोल खेड़ा कामां पहाड़ी मुख्य सड़क मार्ग पर पंच बालयति तीर्थ नूतन आकार ले रहा है जिसमें जैन धर्म के अनुसार पंच बालयति तीर्थंकर वासु पूज्य भगवान, मल्लिनाथ भगवान, नेमिनाथ भगवान,पार्श्वनाथ भगवानं महावीर स्वामी भगवान की वृहद जिनबिम्ब स्थापित किये गए हैं जिनकी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन 15 फरवरी से झंडारोहण के साथ होगा।
मुनि संघ का 14 फरवरी को सम्भावित मंगल प्रवेश जैन समाज से प्राप्त सूचना के अनुसार मुनि प्रणम्य सागर महाराज का मंगल प्रवेश 14 फरवरी को बोलखेड़ा ग्राम में सम्भावित है। संजय जैन बड़जात्या ने बताया की 9 फरवरी को मथुरा चौरासी से संघ का पद विहार प्रारम्भ हुआ है जो गोवर्धन, डीग व कामां होते हुए बोलखेड़ा पहुँचेगा। पंचकल्याणक के समस्त आयोजन गोकुल राम चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित किये जा रहे हैं। भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ 15 फरवरी को झंडा रोहण व घटयात्रा के साथ होगा।
प्रथम बार होगा मुनि प्रणम्य सागर का आगमन अर्हम योग प्रणेता के नाम से प्रसिद्ध मुनि प्रणम्य सागर महाराज का बृजक्षेत्र में प्रथम बार आगमन हो रहा है। आसपास की संपूर्ण जैन समाजों में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर बड़ा उत्साह नजर आ रहा है और मंदिर समिति के द्वारा भी निर्माण कार्य में तेजी कर दी गई है। उधर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर तैयारीयां भी प्रारंभ हो गई है।
पंच बालयति तीर्थंकर जैन धर्म के अनुसार 24 तीर्थंकर हुए हैं उसमें से पांच तीर्थंकर बालयति अर्थात बाल ब्रह्मचारी है क्रमशः बारहवें तीर्थंकर वासुपूज्य स्वामी,उन्नीसवें तीर्थकर मल्लिनाथ स्वामी, बाइसवें नेमिनाथ,तेइसवें पार्श्वनाथ, चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पंच बालयति का यह प्रथम क्षेत्र है जहाँ वृहद वेदी पर त्रय व्यवस्था के क्रम में प्रतिमाओं को विराजित किया गया है। समिति द्वारा क्षेत्रीय समाजों से सम्पर्क कर आयोजन को भव्य बनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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