धर्म समाज संस्कृति की रक्षा के समस्त गुण देने वाली खानी बाई(नेत्र दानी) का हुआ देवलोकगमन
बूंदी, 13 मार्च। धर्म समाज संस्कृति की रक्षा के पूरे परिवार को समस्त गुण देने वाली श्रीमती खानी बाई नेत्रदानी )धर्मपत्नि स्व. एडवोकेट मदनलाल जैन का स्वर्गवास दिनांक 11.03.2026 को हो गया।
खानी बाई का जन्म 29 अगस्त सन् 1937 में अति पवित्र दिन कृष्ण जन्माष्टमी पर हुआ था। उनके पिता का नाम मोतीशंकर झालाणी तथा माताजी का नाम कजोड़ी बाई था जो बून्दी निवासी थे। आपका विवाह लगभग 18 वर्ष की आयु मंे मदनलाल जैन के साथ सम्पन्न हुआ। स्व. मदनलाल जैन बूंदी के ख्यातिनाम अभिभाषक रहे हैं।
दिवंगत आत्मा अत्यन्त धर्म परायण अपने जीवन पर्यन्त तक रही है। उन्होंने मृत्यु पर्यन्त अपने नेत्रों का दान किया है। स्वर्गवास के बाद अपने नेत्रदान करके दो व्यक्तियों को रोशनी दे गयी।उनकी देव, शास्त्र, गुरु मंे पूरी आस्था थी। श्रावक के षट कर्मों देवउपास्ति, स्वाध्याय, संयम, तप, गुरु उपास्ति का जीवन पर्यन्त तक पालन किया एवं अपनी चंचला लक्ष्मी का सदैव धार्मिक एवं परोपकार कार्यों में उपयोग किया। आपने अपने जीवनकाल में पर्वतराज सम्मेदशिखर जी, बाहुबली जी, कुण्डलपुर, सोनागिरी जी आदि सिद्ध एवं अतिशय क्षेत्रों की यात्राएं की।
आपके चार पुत्र जैनेन्द्र कुमार, ओमप्रकाश, कमल कुमार एवं राजकुमार जैन हैं। आपके एक पुत्री आशा पाटनी है। चार पुत्र वधु क्रमशः राजकुमारी, विमला, पदमा, प्रीति है। आपके बडे़ पुत्र जैनेन्द्र कुमार जैन जिला एवं सेशन न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए हैं तथा वर्तमान में सकल दिगम्बर जैन समाज कोटा में कार्याध्यक्ष हैं तथा खण्डेलवाल सरावगी समाज नदी पार क्षेत्र कोटा के अध्यक्ष हैं। ओमप्रकाश जैन स्टेट बैंक आॅफ इंडिया से प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। ओमप्रकाश जैन पूर्व में खण्डेलवाल सरावगी समाज तथा सकल जैन समाज के अध्यक्ष रहे हैं तथा वर्तमान में सकल जैन समाज बूंदी कार्याध्यक्ष हैं। कमल कुमार जैन ने अपने पिता का ही आॅफिस संभाला है एवं बंूदी में प्रतिष्ठित रूप से वकालत कर रहे हैं। राजकुमार जैन, भारतीय संचार विभाग में सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। दामाद सुरेशचंद पाटनी अजमेर निवासी हैं जो स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में कार्यरत होकर प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
आपके पांच पौत्र क्रमशः रोहित जैन, डाॅ. मोहित जैन, अरिहंत, अंकित, एडवोकेट अक्षय हैं। पौत्रवधु में क्रमशः रुचि, शिल्पा, दीप्ति, तृप्ति हैं। पड़पौत्र अविक, अतिशय, सम्यक, पड़पौत्री आरोही, अवन्या, तोशिका है। इस प्रकार आप भरापूरा परिवार अपने पीछे छोड़कर गई है।
यह भी विचित्र संयोग है कि आपका विवाह भी शीतला अष्टमी के दिन हुआ तथा देवलोकगमन भी शीतला अष्टमी के दिन हुआ है। आपका जन्म एवं देवलोक गमन दोनों ही अतिविशिष्ट दिन हुआ है। तीये की बैठक व मंदिर के उठावने की बैठक का संचालन समाज के अध्यक्ष संतोष पाटनी, मंत्री योगेन्द्र जैन ने किया।
-रविन्द्र काला
जैन गजट संवाददाता, बूंदी
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