दक्षिण पश्चिम रेलवे पर जोनल रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति (ZRUCC) की 25वीं बैठक आज हुबली में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर महाप्रबंधक पी. अनंत ने की।
यह बैठक रेलवे के विभिन्न हितधारकों के साथ बेहतर प्रतिनिधित्व एवं परामर्श के उद्देश्य से आयोजित की गई। बैठक में यात्री सुविधाओं, ट्रेन सेवाओं तथा बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित मुद्दों और चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अपर महाप्रबंधक पी. अनंत ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए वर्ष 2026-27 के रेलवे बजट की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने दक्षिण पश्चिम रेलवे में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी तथा त्यौहार एवं छुट्टियों के मौसम में यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई गई विशेष ट्रेनों और जोड़े गए अतिरिक्त डिब्बों के बारे में अवगत कराया। साथ ही उन्होंने बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं का विवरण प्रस्तुत करते हुए आश्वासन दिया कि एसडब्ल्यूआर कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं के विस्तार हेतु निरंतर प्रयासरत है।
बैठक के दौरान सदस्यों को यात्री सुविधाओं, बुनियादी ढांचा विकास, अतिरिक्त ठहराव सहित ट्रेन सेवाओं, ट्रेनों की आवृत्ति में वृद्धि तथा आरओबी/आरयूबी के निर्माण से संबंधित विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई।
जेडआरयूसीसी सदस्य महेन्द्र सिंघी ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि बेंगलुरु–मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस को हुब्बली–धारवाड़ मार्ग से चलाने की जो घोषणा की गई है, उसका संचालन शीघ्र किया जाए। उन्होंने हुब्बली से जोधपुर तथा उत्तर भारत के अन्य शहरों के लिए गर्मी की छुट्टियों और वैवाहिक सीजन के दौरान विशेष ट्रेनों के संचालन, एवं हुब्बली से हैदराबाद तथा हैदराबाद से हुब्बली के लिए रात्रिकालीन ट्रेन चलाने की भी मांग रखी। इस पर रेलवे अधिकारियों ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर बेल्लारी सांसद ई. तुकाराम, चिक्कोडी सांसद प्रियंका सतीश जारकीहोली, विधायक यू. बी. बनकार सहित अन्य सदस्यों ने उपस्थित रहकर अपनी-अपनी मांगें रखीं।
बैठक में उप महाप्रबंधक, प्रमुख विभागाध्यक्ष तथा दक्षिण पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
अपर महाप्रबंधक पी. अनंत ने आश्वासन दिया कि जेडआरयूसीसी सदस्यों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मांगों और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा उन्हें पूरा करने के लिए दक्षिण पश्चिम रेलवे द्वारा ठोस प्रयास किए जाएंगे, ताकि विभिन्न रेलवे हितधारकों की आवश्यकताओं का प्रभावी रूप से प्रतिनिधित्व किया जा सके।











