चंद्रप्रभु भगवान मोक्ष कल्याणक महोत्सव
कोलकाता हावड़ा श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर डबसन हावड़ा में आज सोमवार फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन के बाद सभी साधर्मी बंधुओं ने आनंद एवं अत्यंत भक्तिभाव से वर्तमान चौबीसी के आठवें तीर्थंकर 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया
चंद्रप्रभु भगवान का जन्म चंद्रपुरी (चन्द्रपुर) में इक्ष्वाकु कुल में राजा महासेन और माता लक्ष्मणा के यहाँ हुआ था। उनका प्रतीक चिह्न चंद्रमा है और शरीर का वर्ण भी चंद्रमा के समान श्वेत था। उन्होंने पौष कृष्ण एकादशी के दिन दीक्षा ली,फाल्गुन कृष्ण सप्तमी को केवल ज्ञान प्राप्त किया और सम्मेद शिखर के ललित कूट है जेह से मोक्ष प्राप्त किया।
श्री चन्द्रप्रभ जिनेंद्रादि मुनि 84 अरब,72 करोड़,80 लाख,84 हजार 555 मुनि इस ललितकुट से सिद्ध भये
*ब्रह्मचारी मिलाप जी गंगवाल,शैलेश गंगवाल,भागचंद बड़जात्या ,बसंत सेठी,भानुप्रकाश काशलीवाल ,अखिलेश जैन,रितेश काला,राजेश अजमेरा, विनीत जैन, विनोद गंगवाल,विकाश जैन
आदि सभी साधर्मी बंधुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया*
चंद्रप्रभु भगवान के निर्वाण महोत्सव की शुभ अवसर पर आज हावड़ा डबसन सहित आसपास के क्षेत्रों से अनेक श्रद्धालु व गणमान्य जन मंदिर जी में उपस्थित होकर सातिशय पुण्य अर्जित किया















