बोलखेड़ा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव:- तीसरा दिवस जन्मकल्याणक
तीर्थंकरों के जन्म को ही जन्मकल्याणक कहा जाता है:- मुनि प्रणम्य सागर
जन्मकल्याणक भव्य शोभायात्रा में उमड़ पड़ा जैन श्रावकों का हुजूम।
जम्बू स्वामी की तपोभूमि ग्राम बोलखेड़ा में चल रहे जैन धर्म के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन जन्मकल्याणक के अवसर पर अर्हम योग प्रणेता मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने कहा कि जैन परंपरा में तीर्थंकर के जन्म कल्याणक पर सौधर्म इंद्र द्वारा नवजात प्रभु को सुमेरु पर्वत की पांडुकशिला पर ले जाकर क्षीरसागर के पवित्र जल व दिव्य औषधियों से अभिषेक करना जन्माभिषेक कहलाता है।
मुनिराज ने कहा कि तीर्थकर प्रभु का जन्म ही अनेक जीवों के कल्याण का कारण बनता है। अतः उनके जन्म को जन्म कल्याणक कहते हैं। तीर्थकर के अतिरिक्त अन्य किसी के जन्म को जन्म कल्याणक नहीं कहा जाता। जिस समय तीर्थकर भगवान का जन्म होता है, उस समय तीनों लोकों में अंधकार का नाश करनेवाला उद्योत क्षण भर में ही फैल जाता है।
जन्मकल्याणक शोभायात्रा तीर्थंकर बालक का अयोध्या में जन्म होते ही सम्पूर्ण नगरी में उल्लास व उत्साह छा गया। शचि इंद्राणी माता मरुदेवी की निद्रा का फायदा उठा कर तीर्थंकर बालक को ले आती हैं।जिसे सौधर्म इंद्र ऐरावत हाथी पर विराजमान कर सुमेरु पर्वत स्थित पांडुक शिला पर एक हजार आठ कलशों से जन्माभिषेक करते हैं। इस अवसर पर ग्राम बोलखेड़ा में भव्य शोभायात्रा बैंड बाजो,बग्गियों पर विराजमान इंद्र इन्द्राणीयों के साथ जैन धर्म के जयकारों के मध्य निकाली गई। शोभायात्रा में महिलाएं केशरिया परिधान पहन भक्ति नृत्य करते हुए चल रही थी ग्रामवासियों द्वारा जगह जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा स्वागत किया गया। युवा वर्ग भी बहुत ही उत्साहित नजर आ रहा था। सौधर्म इंद्र ऐरावत हाथी पर विराजमान हो बालक आदिकुमार को लेकर चल रहे थे तो सम्पूर्ण ग्रामवासी कौतूहल से इस दृश्य को देख कर बड़े रोमांचित हो रहे थे।
पांडुक शिला पर हुआ अभिषेक प्रतिष्ठाचार्य शुभम भैया व धीरज भैया ने बताया कि पांडुक शिला पर प्रथम जन्माभिषेक किया गया तो कुबेर ने रत्नों की वर्षा की। इस अवसर पर जैन श्रावकों में अभिषेक करने की होड़ लग गयी। महिलाएं भी मंगल गान करने लगी। गोकुल राम ट्रस्ट द्वारा आयोजित पंचकल्याणक में अध्यक्ष गोकुल जैन ने बताया कि दूरदराज व आसपास के हजारों नर नारियों ने पंचकल्याणक में भाग लेकर पुण्य का संचय किया है। सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि मैं अभिभूत हूँ जो आप सब का महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त हुआ है।
18 फरवरी को तप कल्याणक त्रिलोक जैन के अनुसार 18 फरवरी को बालक आदिकुमार के तपकल्याणक की क्रियाएं की जाएगी।इस अवसर पर दीक्षा विधि संस्कार के आयोजन भी किये जायेंगे।
















