भक्तामर महिमा मंडल संगीतमय विधान
कोलकाता हावड़ा जिस तरह दिन की शुरुआत देव दर्शन से की जाती हैं उसी तरह से आज पौष शुक्ल त्रयोदशी दिन गुरुवार को नूतन अंग्रेजी बर्ष की शुरुआत श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर जी डबसन हावड़ा में अभिषेक शांतिधारा एवं भक्तामर महिमा मंडल संगीतमय विधान के साथ भव्य रुप में की गयी
सभी भव्य जीवों ने इस अवसर पर प्रभु का अभिषेक,शांतिधारा,पूजन एवं विधान किया
भक्तामर स्त्रोत्र की रचना श्री मानतुंग आचार्य ने की थी इस स्त्रोत का दुसरा नाम आदिनाथ स्त्रोत्र भी है यह संस्कृत में लिखा गया है प्रथम अक्षर भक्तामर होने के कारण ही इस स्त्रोत का नाम भक्तामर स्त्रोत पड़ गया ये वसंत तिलका छंद में लिखा गया है
भक्तामर स्त्रोत में 48 श्लोक है हर श्लोक में मंत्र शक्ति निहित है इसके 48 के 48 श्लोको में “म “न”त”र” यह चार अक्षर पाए जाते हैं
मिलाप जी गंगवाल,प्रमिला बिनायका,शशि काशलीवाल,शांति देवी गंगवाल,संगीता बडजात्या,शैलेश गंगवाल,भागचंद बड़जात्या,विमल टोंग्या,विनीत जैन,पुष्पा काशलीवाल,संगीता पाटनी,सीमा पाटनी,मंजू पांडया अवंतिका जैन,सुरेश गंगवाल,राजेश अजमेरा,अचल जैन,राजकुमार जैन आदि सभी साधर्मी बंधुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया
इस भव्य धार्मिक कार्यक्रम में हावड़ा डबसन सहित आसपास के क्षेत्रों से अनेक श्रद्धालु व गणमान्य जन उपस्थित रहे। संगीतमय विधान में सभी श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे
















