भगवत अवस्था प्राप्त होती है : उपाध्याय श्री विशेषसागर जी महाराज
✍️विनोद रोकडे जैन मालेगांव
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मोताला जैन मंदिर में धर्मसभा को किया संबोधित, गुरु के महत्व और पुण्य कमाने के अवसर पर दिया विशेष प्रवचन
मोताला – “जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू ही नहीं होता। गुरु के बिना व्यक्ति मन का राजा बन जाता है और उसे अपनी ही बात सही लगती है।” ये प्रेरणादायी उद्गार पूज्य उपाध्याय श्री विशेषसागर जी महाराज ने मोताला जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन में धन कमाने के अवसर कई बार मिलते हैं, लेकिन धर्म और पुण्य कमाने का अवसर बहुत दुर्लभ होता है। पुण्यात्मा जीव ही पुण्य से पुण्य कमा सकता है। इस जन्म में कमाया गया धन अगले भव में काम नहीं आता, लेकिन इस भव में कमाया गया पुण्य अनेक भवों तक साथ देता है।
आगम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सौ नए मंदिर बनवाने की अपेक्षा एक जीर्ण-शीर्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कराना अधिक श्रेष्ठ माना गया है। हर व्यक्ति अपने रहने के लिए मकान बनाता है, लेकिन सच्चे भाग्यशाली वे होते हैं जो परमात्मा के मंदिर निर्माण या जीर्णोद्धार में सहयोग करते हैं। ऐसे पुण्य कर्म करने वाला व्यक्ति एक दिन भगवत अवस्था को प्राप्त करता है।
4 अप्रैल 2026 को दोपहर 11:45 बजे शांतिनाथ विधान तथा पं. अर्थव जैन के मार्गदर्शन में मंदिर शिलान्यास विधि संपन्न हुई। इस अवसर पर मुख्य शिलान्यास करने का सौभाग्य राजकुमार जैन (रावेर) को प्राप्त हुआ।
पूज्य उपाध्याय श्री पिछले 12 वर्षों से महाराष्ट्र में धर्मप्रभावना कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से अब तक 25–26 मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं प्रतिष्ठा कार्य पूर्ण हो चुका है।
इसके अलावा, 18 से 22 फरवरी 2026 के दौरान सर्वज्ञ तीर्थ, पुसेगांव में अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भव्य और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। वर्तमान में पूज्य उपाध्याय श्री विशेषसागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार विरागोदय तीर्थ, पथरिया की ओर जारी है।












