भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाड़ू महोत्सव मनाया गया

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युगल मुनिराजों के सान्निध्य में हुआ महामस्काभिषेक

मुरैना (मनोज जैन नायक) नगर के सभी जिनालयों में भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाड़ू एवं अन्य विभिन्न कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया ।
इस पावन अवसर पर नगर में चातुर्मासरत जैन संत मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिनाथ से महावीर स्वामी तक सभी ने मोक्ष प्राप्ति के लिए ‘त्रिरत्न’ (सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, और सम्यक चरित्र) का मार्ग बताया । यह मार्ग आत्मा को कर्मों के बंधन से मुक्त करने और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक है ।
मोक्ष आत्मा के अस्तित्व की एक आनंदमय अवस्था है, जो सभी कर्म बंधनों के विनाश के बाद प्राप्त होती है। कहा जाता है कि एक मुक्त आत्मा ने असीमित आनंद, असीमित ज्ञान और असीमित बोध के अपने वास्तविक और मौलिक स्वरूप को प्राप्त कर लिया है। ऐसी आत्मा को सिद्ध कहा जाता है और जैन धर्म में पूजनीय माना जाता है। जैन धर्म में, मोक्ष सर्वोच्च और सबसे उत्तम लक्ष्य है जिसे प्राप्त करने के लिए आत्मा को प्रयास करना चाहिए। वास्तव में, यही एकमात्र लक्ष्य है जो व्यक्ति को रखना चाहिए । अन्य लक्ष्य आत्मा के वास्तविक स्वरूप के विपरीत हैं। सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चारित्र और प्रयास से सभी आत्माएँ इस अवस्था को प्राप्त कर सकती हैं। इसीलिए जैन धर्म को मोक्षमार्गया “मुक्ति का मार्ग” भी कहा जाता है।
नसियांजी जैन मंदिर में हुआ भव्य आयोजन
जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर फाटक बाहर स्थित नसियां जी मंदिर में मूलनायक स्वामी पार्श्वनाथ का महामस्काभिषेक किया गया । प्रथम कलश से जलाभिषेक करने का सौभाग्य पदमचंद गौरव जैन चैंटा वाले परिवार, शांतिधारा महेशचंद राकेशकुमार अनिल संजू जैन अझेड़ा परिवार को प्राप्त हुआ । श्रीजी के चरणों में मुख्य लाड़ू सुरेशचंद चंद्रप्रकाश राजकुमार कुथियाना परिवार ने समर्पित किया ।
इस अवसर पर प्रातः से ही भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में उपस्थित थी । सभी ने भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा करते हुए अष्टद्रव्य से पूजन किया । निर्वाण कांड का वाचन करते हुए मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ लाड़ू समर्पित किया ।
बड़े जैन मंदिर में हुआ पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक
मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर युगल मुनिराजश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित पवन शास्त्री दीवान सागर के आचार्यत्व में बड़े जैन मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक किया गया । प्रथम कलश से महामस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य देवदत्त चेतनमाला जैन को प्राप्त हुआ । तत्पश्चात प्रदीप कुमार संदीप कुमार जैन आदिनाथ सप्लायर्स, महावीर प्रसाद विमल कुमार जैन रेडियोज, पंकज अरिहंत जैन मेडिकल, वीरेंद्र कुमार प्रासुक जैन बाबा सहित अन्य श्रावकों ने महामस्तकाभिषेक किया । प्रथम शांतिधारा पवनकुमार राहुल कुमार विचपुरी वाले, द्वितीय शांतिधारा रिंकू जैन रितेश जैन (जितवार का पुरा) ने की ।
भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित किया निर्वाण लाड़ू
भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक के अबसर पर श्री जिनेंद्र प्रभु के श्री चरणों में निर्वाण लाड़ू समर्पित किया गया । प्रथम मुख्य लाड़ू चढ़ाने का सौभाग्य अभिषेक जैन टीटू अनिकेत जैन रुई की मंडी मुरैना को प्राप्त हुआ । रुई की मंडी मुरैना निवासी अभिषेक जैन टीटू (आलोक प्रेस) निरंतर 17 वर्षों से मोक्ष कल्याणक पर भगवान पार्श्वनाथ के श्री चरणों में निर्वाण लाड़ू समर्पित करते आ रहे हैं। उन्होंने निरंतर 23 लाड़ू समर्पित करने का संकल्प लिया था, इसवार उन्होंने 17वां मुख्य लाड़ू समर्पित किया । टीटू भाई 2006 से आज तक निरंतर श्री जिनेंद्र प्रभु को प्रतिवर्ष लाड़ू समर्पित करते आ रहे हैं। संकल्प के अनुसार वे 2029 तक लाड़ू समर्पित करेंगे ।
सभी भक्तों ने सर्वप्रथम निर्वाण कांड का सामूहिक वाचन किया । थाली में निर्वाण लाड़ू के साथ अष्टद्रव्य एवं दीप प्रज्वलित कर भगवान पार्श्वनाथ के श्री चरणों में लाड़ू समर्पित किए । लाड़ू अर्पित करते ही सम्पूर्ण पंडाल श्री पार्श्वनाथ भगवान की जय जयकारों से गूंज उठा । सभी ने घंटा, झालर एवं तालियां बजाकर हर्ष व्यक्त किया ।
जैन मंदिरों में रहा उत्सव सा माहौल
नगर के सभी जैन मंदिरों में मोक्ष सप्तमी का पर्व मनाया गया । सभी मंदिरों में उत्सव जैसा माहौल था । बड़े जैन मंदिर में जैन मिलन बालिका मंडल एवं नन्हें मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए । सभी जैन धर्मावलंवियों ने भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा अर्चना की ।
मोक्ष कल्याणक पर्व की सभी क्रियाएं सागर से पधारे प्रतिष्ठाचार्य पंडित पवन शास्त्री दीवान ने मंत्रोचारण के विधि विधान पूर्वक संपन्न कराई । इस अवसर पर ब्रह्मचारी संजय भैया बम्होरी, ब्रह्मचारी राहुल भैया गंज बासौदा, विद्वत नवनीत शास्त्री एवं अन्य त्यागीवृति विशेष रूप से उपस्थित थे ।

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