आसमान जब बरसता है तो टापरा रोता है… डा. रेखा खराड़ी के काव्य पाठ ने आम आदमी के जीवन की वास्तविकता का परिचय दिया………..
महावीर इंटरनेशनल की ई चौपाल दोस्ती से सेवा ओर सेवा से संतुष्टि में वागड़ मेवाड़ की मशहूर कवयित्री, साहित्य समीक्षक, छायावादी कविता की युवा हस्ताक्षर तथा जल, जंगल जमीन पर अपनी बेबाक लेखनी चलानेवाली डूंगरपुर की डॉ. रेखा खराड़ी ने अपनी कविताओं से दर्शकों को झकझोर दिया। गरीब आदमी की बेबसी को अभिव्यक्त करती उनकी कविता आसमान जब बरसता है तो टापरा रोता है सभी को अंतर्मन तक आंदोलित कर गई। कार्यक्रम संयोजक अजीत कोठिया ने बताया की बेबसी भरी डा. रेखा खराड़ी की इन पंक्तियों “ये टापरा मुझे क्यों दिया, काफी था एक पेड़, उस पर में एक डाल से उस डाल तक आसानी से चला तो जाता था”पूरी चौपाल को भावुक कर दिया। डा रेखा का प्रेम गीत “अब क्यों पतझड़ आया इस दिल के कानन में”सबकी आंखों को भीगो गया। आयोजन मे गोपाल कृष्ण सेवक ने भी काव्यपाठ किया। महावीर इंटरनेशनल की ई चौपाल में डॉ. रेखा खराड़ी ने नदी शब्दों की, शून्य में छटपटाते हुए, ज से जल, जंगल, जमीन जैसे अपने मशहूर काव्य संग्रहों की चुनिंदा कविताएं पढ़ी जो जीवन के यथार्थ का चित्रण करती सी लगी। आयोजन को रतन फलोदिया, सुनीता जम्मार, पृथ्वीराज जैन, सुरेश चंद्र गांधी, जयंतीलाल ननोमा, महेश कुमार मूंड , डा. नवीन उपाध्याय, नागरमल जांगिड़, चंद्रकला भूरा ने संबोधित किया। प्रारंभ में ईश वंदना वीरा आरती मूंड ने की। संचालन अजीत कोठिया इंटरनेशनल डायरेक्टर नॉलेज शेयरिंग एवं ई चौपाल ने किया, आभार वीर संजय बेद ने किया।
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