॥ अपने अस्तित्व की रक्षा का, यह पावन अभियान। जैन जनगणना जागृति, बने समाज की पहचान॥
श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के तत्वावधान में जैन जनगणना जागृति अभियान का भव्य शुभारम्भ
राष्ट्रसंत परम्पराचार्य 108 श्री प्रज्ञसागर जी मुनिराज, पूज्य श्री अजित मुनि जी महाराज एवं पूज्य श्री अमित मुनि जी महाराज संसध के पावन सान्निध्य, प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में, श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के तत्वावधान म,ें जैन समाज के चारों सम्प्रदायों के विशिष्टजनों की गरिमामयी उपस्थिति में जैन जनगणना जागृति अभियान का भव्य शुभारम्भ दिनांक 01 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित एन.डी.एम.सी. सभागार में हुआ।
समारोह का शुभारम्भ शास्त्री जी के सारगर्भित एवं प्रेरणादायी कविता-पाठ से हुआ, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को वैचारिक ऊर्जा से भर दिया।
प्रसिद्ध समाजशास्त्री श्री ललित सरावगी (वाह जिंदगी) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “हम सब पहले जैन हैं न दिगम्बर, न श्वेताम्बर। हमें सराक एवं रंग्या जैसी जातियाँ जो जैन तीर्थंकरों की आराधना करती हैं, उन्हें जैन समाज की मुख्यधारा से जोड़ना आज की महती आवश्यकता है।”
युवा महासभा के राष्ट्रीय कार्याघ्यक्ष श्री विकेश मेहता जैन ने अपने ओजस्वी संबोधन में समाजजनों से आग्रह किया कि वे व्यापार एवं नौकरी के साथ-साथ समाजसेवा के लिए भी समय निकालें। उन्होंने कहा कि जैन जनगणना जागृति अभियान को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए तथा महासभा को समाज के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं एवं प्रबुद्धजनों की प्रतिभा का समुचित उपयोग करना चाहिए।
ऑल इंडिया स्थानकवासी समाज के प्रणेता श्री नरेश आनंद प्रकाश जैन ने जनगणना अभियान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल देते हुए कहा कि हमें अपने नाम के साथ “जैन” अवश्य लिखना चाहिए तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जनगणना प्रपत्र भरने की विधि समझानी चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सत्येन्द्र जैन ने दक्षिण भारत में नाम के साथ “जैन” न लिखे जाने की प्रवृत्ति पर ध्यान आकृष्ट किया। श्री सुभाष जैन ने जनगणना कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार को महावीर जयंती, साधु-संतों के प्रवचनों एवं जैन विद्यालयों तक पहुँचाने का आग्रह किया।
श्री हसमुख जैन गांधी ने मंदिरों, स्थानकों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागृति की आवश्यकता बताई।
तेरापंथ समाज के श्री के.सी. जैन ने तेरापंथ समाज की ओर से जैन जनगणना जागृति अभियान को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
पश्चिम बंगाल के सराक सम्प्रदाय से डा. त्रिदिब कुमार हलदर एवं डा. अरुप हलदर ने समारोह में सहभागिता की। डा. अरुप हेल्डर ने बताया कि सराक समाज के लोग तीर्थंकर आदिनाथ एवं तीर्थंकर पार्श्वनाथ की पूजा-आराधना करते हैं तथा णमोकार मंत्र का नियमित जाप करते हैं। उन्होंने सराक समाज को जैन समाज में समाहित करने का आग्रह किया।
श्री मंडार जैन संध के अध्यक्ष श्री दिनेश कुमार जैन दोशी ने प्रस्तावित किया कि जैन जनगणनाा अभियान को साधु-सान्तों के प्रवचन द्वारा दूर दराज के गांवो तक पहुँचाया जा सकता है। हमारे समाज की संस्थायें सम्र्पूण देश में है। हमें उन्हें इस अभियान में भागीदार बनाना है।
दक्षिण भारत जैन सभा के श्री विनोद डुण्डावर ने सामाजिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण पर बल देते हुए जाति-उपजाति के भेदभाव को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने तमिलनाडु में ब्राह्मी लिपि के अवशेषों का उल्लेख करते हुए सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य एवं आचार्य भद्रबाहु के दक्षिण भारत प्रवास की ऐतिहासिक पुष्टि की।
झारखंड से पधारे प्रतिनिधि श्री अजीत जैन ने बताया कि भगवान महावीर का विहार झारखंड के सरायकेला क्षेत्र में हुआ था। ऐसा वर्णित है।
डॉ. वीरसागर जैन ने जैन जनगणना हेतु ।प् आधारित जैन जनगणना ऐप विकसित करने का सुझाव दिया तथा युवाओं की सक्रिय सहभागिता पर बल दिया। उन्होंने जनगणना प्रपत्र में धर्म कॉलम में “जैन” तथा भाषा कॉलम में “प्राकृत” लिखने का आग्रह किया।
भारतीय जैन संगठन के श्री नयन जैन ने कहा कि संत, संस्था और समाजकृतीनों के सामूहिक प्रयास से ही यह अभियान राष्ट्रव्यापी सफलता प्राप्त कर सकता है।
सी.ए. राजीव जैन ने बच्चों को धर्म से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री सुखराज सेठिया ने क्षेत्रीय सम्मेलनों, सोशल मीडिया एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से जनगणना अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार का सुझाव दिया।
महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री पवन जैन गोधा ने युवाशक्ति की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन जनगणना जागृति अभियान की सफलता में युवाओं की सहभागिता निर्णायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि जिन समाजजनों के पास संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ युवाओं का प्रत्यक्ष सहयोग अत्यंत उपयोगी होगा। युवाशक्ति न केवल जनगणना प्रक्रिया को समझाने में सहायक बनेगी, बल्कि घर-घर पहुँचकर समाजजनों को जागरूक करने एवं उन्हें अभियान से जोड़ने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि युवा वर्ग की ऊर्जा, तकनीकी समझ और सेवा-भाव इस अभियान को गति प्रदान करेगी और जैन समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं विधिवेत्ता श्री विष्णु शंकर जैन ने जैन समाज के हितार्थ न्यायलय में चल रहें विभिन्न मामलों में अपने योगदान की चर्चा की। उन्होंने कुतुबमीनार से संबधित प्रकरण का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका निर्माण 27 जैन एवं हिन्दु मंदिरों के विध्वंस के उपरान्त किया गया था। तथा इस ऐतिहासिक तथ्य से जुड़े मामले में वे वर्तमान में न्यायलय में विधिक पक्ष प्रस्तुत कर रहें हैं।
अपने वक्तव्य में उन्होंने जैन समाज की निरंतर घटती जनसंख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि समाज के अस्तित्व एवं भविश्य की सुरक्षा के लिए जनसंख्या वृद्वि और सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवष्यक है। उन्होंने समाजजनों से आहवान किया कि वे इस विशय पर गंभीरता से विचार करें तथा भावी पीढ़ी के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सकारात्मक प्रयास करें।
संबंधित विभिन्न न्यायिक मामलों में अपने योगदान का उल्लेख किया तथा जैन समाज की घटती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जनसंख्या वृद्धि एवं जागृति की आवश्यकता पर बल दिया।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजराज जैन गंगवाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में जैन जनगणना जागृति अभियान की ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अभियान जैन समाज की वास्तविक स्थिति, संख्या एवं आवश्यकताओं को उजागर करने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने महासभा के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं समाजजनों से आह्वान किया कि वे इस अभियान के दोनों चरणों में पूर्ण समर्पण, सक्रियता एवं जिम्मेदारी के साथ सहभागी बनें, ताकि यह महाअभियान अपने उद्देश्य में पूर्णतः सफल हो सके।
उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जैन जनगणना अभियान को दो चरणों में सम्पन्न किया जाएगा
ऽ प्रथम चरण (अप्रैल 2026 से सितम्बर 2026) के अंतर्गत जैन परिवारों के मकानों की गणना की जाएगी, जिसमें मकानों की स्थिति, निर्माण प्रकार तथा उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से संबंधित विवरण एकत्रित किया जाएगा।
ऽ द्वितीय चरण (फरवरी 2027) में जनगणना के माध्यम से शिक्षा स्तर, प्रजनन दर, धर्म एवं भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण आँकड़े संकलित किए जाएंगे, जो भविष्य की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक योजनाओं की आधारशिला बनेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन दोनों चरणों से प्राप्त आँकड़े न केवल समाज की योजनाबद्ध प्रगति में सहायक होंगे, बल्कि जैन समाज की पहचान, अधिकारों एवं सांस्कृतिक संरक्षण के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
उन्होंने सभी से जनगणना प्रपत्र के धर्म कॉलम में “6 दृ श्र।प्छ तथा मातृभाषा कॉलम में “प्राकृत” लिखने का विशेष अनुरोध किया।
पूज्य श्री अमित मुनि जी महाराज ने कहा कि “जैनत्व हमारी संस्कृति और हमारा गौरव है।”
पूज्य श्री अजित मुनि जी महाराज ने जैन धर्म को जीवन-कला बताते हुए संतों एवं संस्थाओं के संयुक्त प्रयास पर बल दिया।
राष्ट्रसंत परम्पराचार्य 108 श्री प्रज्ञसागर जी मुनिराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “जनगणना के माध्यम से ही हम अपने अस्तित्व की रक्षा कर सकते हैं। जो जातियाँ हमसे दूर हो गई हैं, उन्हें पुनः जैन समाज की मुख्यधारा में लाना होगा।” उन्होंने विभिन्न प्रांतों में जैन परम्पराओं का पालन करने वाली जातियों को अपनाने का आह्वान किया।
श्रुत संवर्धिनी महासभा के महामंत्री श्री शरदराज जैन कासलीवाल ने सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से तन-मन-धन से इस अभियान में जुड़ने का अनुरोध किया।
समारोह के अंत में महासभा के महामंत्री श्री पवन जैन गोधा ने देशभर से पधारे सभी महानुभावों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का अत्यंत कुशल, सुव्यवस्थित, विद्वतापूर्ण एवं प्रभावशाली संचालन श्री गजेन्द्र जैन (सी.ए.), ट्रस्टी महासभा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया। उनकी सुमधुर एवं ओजस्वी वाणी, विषय की गहरी समझ तथा समय-प्रबंधन की उत्कृष्ट क्षमता के कारण संपूर्ण समारोह अनुशासित, गरिमामय एवं रोचक बना रहा। उन्होंने प्रत्येक वक्ता को उचित समय और सम्मान प्रदान करते हुए कार्यक्रम को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया, जिससे श्रोतागण अंत तक भावनात्मक रूप से जुड़े रहे। उनके कुशल संचालन से समारोह की भव्यता, गरिमा और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा कार्यक्रम एक आदर्श आयोजन के रूप में स्मरणीय बन गया।
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