अणु परमाणु से नहीं अणु व्रत के धारण करने से विश्व में शांति सम्भव

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“अणु परमाणु से नहीं अणु व्रत के धारण करने से विश्व में शांति सम्भव”
“हिंसा पीड़ित राष्ट्र राह महावीर की तकता है वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है”

✍️ राष्ट्र गौरव
पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा (राज.) की कलम से

भारत वसुंधरा पर समय-समय पर अनेकानेक महापुरुषों, ऋषि, मुनियों,तपस्वियों राम, कृष्ण, महावीर, गौतम बुद्ध जैसी दिव्यत्माओं ने जन्म लेकर संपूर्ण मानव समाज व सृष्टि को “मानव से महामानव” “नर से नारायण” “तीतर से तीर्थंकर” बनने के मार्ग को दिखलाया है। भगवान महावीर स्वामी का जन्म कुंडग्राम में हुआ था, जो वर्तमान में बिहार के वैशाली जिले में स्थित है। उनका जन्म 599 ईसा पूर्व में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर हुआ था। कुंडग्राम को जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मभूमि माना जाता है । महावीर स्वामी का जन्म एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था और उनका मूल नाम वर्धमान था। आज संपूर्ण विश्व बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। अमेरिका, इजरायल, ईराक, ईरान, यूक्रेन यमन, सीरिया इत्यादि देशों में युद्ध चल रहा है।अभी तक लाखों बेगुनाह लोग इस युद्ध में अपनी जान गँवा चुके है ।भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांत आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। कौन कहता है कि भगवान महावीर के सिद्धांत आउट ऑफ डेट हो गए उनके सिद्धांत आउट ऑफ डेट नहीं वरन आज भी अप टू डेट है। उनके मुख्य सिद्धांतों में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य शामिल हैं। ये सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, बल्कि देश समाज संस्कृति और पर्यावरण को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं । जीवन को जीवंत करने में सहायक है।
अहिंसा :- आज के समय में जब हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है, चारों ओर युद्ध,भय, अराजकता, वैमनस्यता दिखाई दे रही है ऐसे समय में महावीर की अहिंसा की बात बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह सिद्धांत न केवल शारीरिक हिंसा को रोकता है, बल्कि मानसिक और वाचनिक हिंसा भी रोकता है नियंत्रित करता है।
सत्य :- वर्तमान समय में जब झूठ, कपट, चोरी, मायाचारी व्यभिचार और धोखाधड़ी आम हो गई है रिश्ते नाते सब तार तार हो रहे है। ऐसे विषम विपरीत समय मे सत्य का पालन करना बहुत जरूरी है। यह सिद्धांत व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर विश्वास और सम्मान बढ़ाता है। कहते भी है सत्य की सदैव जय होती है वो कभी पराजित नहीं हो सकता। हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भी लिखा हुआ है “सत्यमेव जयते” ।
अपरिग्रह :- आज के उपभोक्तावादी विलासिता भरे समाज में अपरिग्रह का सिद्धांत हमें आवश्यकताओं को सीमित रखने और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। कोरोना कॉल ने हमें सादगी एवं सीमित साधनों में रहना सीखा दिया था।
अनेकांतवाद:- यह सिद्धांत हमें विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने और सहिष्णुता को बढ़ावा देने की शिक्षा देता है, जो आज के समय में बहुत जरूरी है। अनेकांत और स्यादवाद इन सिद्धांतों के द्वारा विश्व की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
इन सिद्धांतों को अपनाकर हम एक बेहतर समाज और भविष्य बना सकते है
ब्रह्मचर्य:- भगवान महावीर स्वामी की शिक्षाएं जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। उनके अनुसार, ब्रह्मचर्य का अर्थ है इंसान का अपने मन, वचन, और काय को नियंत्रित करना, और कामवासना से दूर रहना। समस्त विकारो से रहित हो आत्मा में रमण करना । चेतन अवस्था को प्राप्त करना ।
ब्रह्मचर्य आत्म-संयम और आत्म-शुद्धि के लिए आवश्यक है। भगवान महावीर स्वामी के अनुसार ब्रह्मचर्य का पालन करने से इंसान अपने भीतर की शक्तियों को जागृत कर सकता है और आत्म-ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
महावीर शब्द ही अपने आप में सार्थक है
“महावीर का ” म ” कहता है मन का संयम बना रहे महावीर का “ह” कहता है हाथ दया से सना रहे महावीर का “वी” कहता है धीर वीर गंभीर बने महावीर का “र” कहता है राम, कृष्ण, महावीर बने ।”
अंत में इतना ही कहूंगा जैसा कि सुप्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जी जैन एक गीत में बोला
“हिंसा पीड़ित राष्ट्र राह महावीर की तकता है वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है”।
प्रस्तुति
राष्ट्र गौरव ब्यूरो चीफ जिनवाणी टी वी चेनल
पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा (राज)
9414764980

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