अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज की कुलचाराम से बद्रीनाथ अहिंसा संस्कार पदयात्रा चल रही है आज जन्मभुमि छतरपुर से

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हमारी अफवाह के धुएं वहीं से उठते हैं..
जहाँ हमारे नाम से आग लग जाती है..!

हमारे समाज और देश में शोध और खोज करने, कहने, लिखने, लड़ने, लड़वाने और ईर्ष्या, द्वेष की आग लगाने के लिये अनेक दिलचस्प विषय है। कुछ लोग बेसब्री से एक गलती का इन्तजार कर रहे होते हैं। वैसे तो हमारे समाज और देश में अपना कद बढ़ाने और दूसरों का कद घटाने, गिराने या दाग लगाने में कुछ लोगों ने गोल्ड मेडल प्राप्त किया हुआ है।

हमारे समाज और देश में सभ्यता, नैतिकता, सेवा, सदभाव, प्रेम, मैत्री, उदारता से नाम, कद, पद बढ़ और फैल जाता है। किसी के कद, पद को कैसे दूषित और कलंकित किया जाये, इसके लिये समाज और देश में कुछ लोग यन्त्र, तन्त्र, मन्त्र, या कोई षड़यंत्र के माध्यम से, पलक झपकते ही सक्रिय हो जाते हैं। यदि पुण्य का सपोट और भाग्य का शरबत मिल जाये तो इन्सान का कद, पद नौवें आसमान में पहुंच जाता है। कद की बात करें तो हम आप ये नहीं समझ पाते कि अमुक छोटे कद का आदमी जमीन के अन्दर कितना है-? ये सच है कि सामने वाले का कद अपने से कम समझना हम अपना नैतिक, धार्मिक कर्त्तव्य मानते हैं।

मैं देख रहा हूं – आज समाज और देश में जाति, धर्म और धन के प्रभाव से कद, पद छोटा और बड़ा कर दिया जाता है। सेवा, समर्पण, इंसानियत, ईमानदारी, व अनुशासन के लम्बे कद को समाजिक, साम्प्रदायिक, राजनीतिक भेदभाव की तलवारों से पल भर में जमीन पर ला देते हैं। श्रेष्ठ की सराहना दिल से करो, टीका टिप्पणी दिमाग से और समीक्षा खुद के विवेक से करने में ही समझदारी है,, अन्यथा मौन ही श्रेष्ठतम उपाय है। कभी आपने ध्यान दिया! परिंदे कभी एक दूसरे के पंख नहीं कुतरते और एक साथ उड़ते हैं फिर भी………..

सौ बात की एक बात – गुणी जनों को देख हृदय में,, मेरे प्रेम उमड़ आवे वाली कहावत चरितार्थ होना चाहिए…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद

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