अंतरंग की भावना के अनुरूप परिणामों की प्राप्ति होती है – आचार्य निर्भय सागर

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अंतरंग की भावना के अनुरूप परिणामों की प्राप्ति होती है – आचार्य निर्भय सागर
बैज्ञानिक संत दिगम्बराचार्य का भव्य मंगल प्रवेश

मुरैना (मनोज जैन नायक) भगवान महावीर स्वामी ने जो सिद्धांत हमें दिए, उन सिद्धांतो को हमने हृदय से स्वीकार नहीं किया । उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतो का हमने प्रचार प्रसार नहीं किया । यदि हमने भगवान महावीर के सिद्धांतो को हृदय से स्वीकार किया होता, उनके सिद्धांतों का प्रचार प्रसार किया होता तो आज सम्पूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होता । उक्त उद्गार वैज्ञानिक संत आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।
वैज्ञानिक संत आचार्य श्रीनिर्भयसागर महाराज ने जैन दर्शन को समझाते हुए कहा कि जैन धर्म भावना प्रधान धर्म है । जैसी हमारी भावना होती है, जैसे हमारे अंतरंग में विचार आते है, उसी के अनुरूप हमें परिणाम मिलते हैं। हमें अपने अंतरंग में कभी भी अशुभ अथवा गलत विचार नहीं लाने चाहिए । सदैव हमें शुभ विचारों को अंतरंग में रखना चाहिए । हमें अच्छी भावना रखते हुए प्राणी मात्र के कल्याण हेतु प्रयत्नशील रहना चाहिए । हम लोगों ने जैन धर्म के सिद्धांतो को एक समुदाय विशेष के सिद्धांत मानकर अपने तक ही सीमित कर लिया । अच्छा होता यदि हम उनके सिद्धांतों को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास करते । हम सभी केवल मंदिर के अंदर ही अपने तीर्थंकरों के कल्याणक मनाते हैं, पंचकल्याणक करते हैं, जयंतियां मनाते हैं, किंतु उनके जीवन चरित्र के बारे में, उनके सिद्धांतों के संदर्भ में अथवा उनकी चर्या के संबंध में कोई भी प्रचार प्रसार नहीं करते । हम सभी का कर्तव्य है कि भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतो को जन जन तक पहुंचाने के लिए प्रयत्नशील रहें ।
वैज्ञानिक संत दिगम्बराचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ससंघ का मुरैना नगर में भव्य मंगल आगमन हुआ । परम पूज्य गुरुदेव श्री निर्भयसागर महाराज ने अपने शिष्यों मुनिश्री सुदत्तसागर, मुनिश्री भूदत्तसागर, क्षुल्लकश्री चंद्रदत्तसागर, क्षुल्लकश्री यशोदत्तसागर के साथ श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर में धर्म प्रभावना करने के पश्चात पद बिहार करते हुए मुरैना पधारे ।
मुरैना जैन समाज के साधर्मी बंधुओं ने नगर सीमा में पहुंचकर पूज्यश्री के श्री चरणों में श्रीफल भेंटकर आचार्य संघ की अगवानी की । पूज्य आचार्यश्री के संघ को पुलिस पेट्रोल पम्प से गाजे बाजे के साथ भव्य शोभा यात्रा के रूप में नगर के प्रमुख मार्गो से भ्रमण कराते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर लाया गया । शोभा यात्रा में नन्हें मुन्ने बच्चे हाथों में पचरंगीन ध्वजा लेकर चल रहे थे । साधर्मी बंधु एवं महिलाएं श्री जिनेन्द्र प्रभु के जयकारों एवं उनके भक्तिमय भजनों का गायन करती हुई चलायमान थीं । शोभायात्रा के भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर पूज्य आचार्य संघ का पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगवानी की गई। भव्य एवं विशाल शोभा यात्रा पुलिस पेट्रोल पंप से प्रारंभ होकर सूबात रोड, पुल तिराहा, हनुमान चौराहा, झंडा चौक, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुई ।
धर्म सभा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ । सभा के प्रारंभ में साधर्मी बंधुओं ने पूज्य आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन किया ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पूज्य आचार्य संघ का सान्निध्य भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव तक रहेगा । जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के मुख्य संयोजक डालचंद जैन डल्लो, संयोजक मनीष जैन, पदमचंद जैन, नीलेश जैन, पदमचंद चौधरी ने पूज्य आचार्य संघ के श्री चरणों में श्रीफल भेंटकर जन्म कल्याणक महोत्सव में सान्निध्य प्रदान करने वावत निवेदन किया । धर्म सभा का संचालन प्रतिष्ठाचार्य पंडित संजय शास्त्री सिहोनिया ने किया ।

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