आदर्श शिक्षा विधि” ग्रंथ वर्तमान युग में बालक के समग्र विकास, संस्कार-निर्माण एवं मूल्य-आधारित शिक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक

0
2

”आदर्श शिक्षा विधि” ग्रंथ वर्तमान युग में बालक के समग्र विकास, संस्कार-निर्माण एवं मूल्य-आधारित शिक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक

”आदर्श शिक्षा विधि” ग्रंथ की ऐतिहासिक समीक्षा संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मान समारोह हुआ संपन्न

शिक्षा का उद्देश्य केवल बुद्धि विकास नहीं, बल्कि आत्मा का उत्थान है

आचार्य वसुनंदी जी महामुनि राज

फागी संवाददाता
5 मार्च
जयपुर। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रान्त तथा श्री महावीर दिगम्बर जैन शिक्षा परिषद , जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार 5 मार्च को महावीर सभागार, महावीर स्कूल, जयपुर में परम पूज्य प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महामुनिराज द्वारा रचित तथा आर्यिका रत्न 105 श्री वर्धस्व नंदिनी माताजी जी द्वारा संपादित युगप्रवर्तक ग्रंथ “आदर्श शिक्षा विधि” ( आयंस सिक्खा वीही )पर एक भव्य समीक्षा संगोष्ठी एवं प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया |
किसी धार्मिक पुस्तक का जयपुर में यह एक ऐतिहासिक समीक्षा समारोह रहा ।
ग्रंथ शिक्षा व्यवस्था को देगा नैतिक दिशा
ग्रंथ समीक्षा में शिक्षकों ने कहा कि यह 342 पृष्ठों का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-जागरण, चरित्र-निर्माण और मोक्षमार्ग की साधना के रूप में प्रतिष्ठित करता है, कार्यक्रम में अतिथि वक्ता डा० यश जैन व राकेश जैन ने कहा कि जैन दर्शन के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांत जैसे सिद्धांतों के आलोक में यह कृति वर्तमान समय की शिक्षा-व्यवस्था को नैतिक दिशा प्रदान करती है,ग्रंथ में प्राकृत भाषा में 126 गाथाये है,
कार्यक्रम में प्रान्तीय अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने अपने संबोधन में कहा की ग्रंथ 20 सुव्यवस्थितअध्यायों में विभक्त 126 प्राकृत भाषा ( शौरसेनी ) में गाथाओ युक्त है, जिनमें शिक्षा का लक्षण, आवश्यकता, स्त्री शिक्षा, शारीरिक, मानसिक, व्यवहारिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा, आदर्श शिक्षक, आदर्श शिष्य, गुरु-शिष्य संबंध तथा शिक्षाविधि जैसे विषयों का गहन दार्शनिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण किया गया है,श्री पदम बिलाला ने बताया कि आचार्य वसुनंदी जी महाराज का कुण्डलपुर से मंगलमय आशीर्वाद मिला है,समारोह का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन , प्राकृत भाषा में मंगलाचरण के बाद आचार्य वसुनंदी मुनिराज के कुंडलपुर बिहार से वीडियो के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त हुआ, इधर इस ग्रंथ के अहिक्षेत्र यू. पी .में अक्टूबर में हुए विमोचन की क्लिप भी दिखाई गई , उक्त कार्यक्रम में शिक्षकों को पुरुष्कृत किया गया कार्यक्रम में
महावीर शिक्षा परिषद के यशस्वी अध्यक्ष उमराव मल सांघी व मंत्री सुनील बख्शी ने बताया कि कार्यक्रम में सैकड़ों शिक्षकों द्वारा ग्रंथ के व्यापक अध्ययन के उपरांत आयोजित लिखित प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया । प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्रज्ञा जैन व डा० भाग चंद जैन को संयुक्त रूप से , द्वितीय पुरस्कार दिव्या जैन तथा तृतीय पुरस्कार राज मोहन गुप्ता को मिला है , उक्त समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ आई.पी.एस श्री अनिल जैन , विशिष्ट अतिथि :डॉ. यश जैन, असि. प्रोफेसर, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर तथा श्री राकेश जैन, दूरदर्शन पूर्व आई.बी.पी.एस. अधिकारी , जिनका संस्थान व परिषद के पदाधिकारियों द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया । इधर ऐसी उपयोगी व मार्गदर्शक पुस्तक को राष्ट्रीय/ राज्यीय स्तर पर पाठ्य पुस्तक में शामिल करवाने की अपील की गई ,शिक्षा से आत्म उत्थान संस्थान के कोषाध्यक्ष पंकज लुहाड़िया व महेश काला ने आचार्य श्री वसुनंदी जी का स्पष्ट संदेश बताया की “शिक्षा का उद्देश्य केवल बुद्धि-विकास नहीं, बल्कि आत्मा का उत्थान है।” परिषद के शिक्षकों ने समीक्षा में कहा कि यह ग्रंथ वर्तमान युग में बालक के समग्र विकास, संस्कार-निर्माण एवं मूल्य-आधारित शिक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध हो रहा है, उक्त कार्यक्रम में परिषद के कोषाध्यक्ष महेश काला , कमल बाबू जैन , राजीव गाजियाबाद, भारत भूषण अजमेरा, राजेंद्र पापड़ीवाल, विनोद कोटखावदा, मनीष वैद , मुकुल कटारिया तथा संस्थान के सुनील सेठी , ज्ञानचंद भोंच , प्रेम चंद छाबड़ा, राकेश माधोराजपुरा , सोभाग अजमेरा , राजेन्द्र ठोलिया, ताराचंद गोधा , सुरेंद्र काला , योगेश टोडरका, शकुंतला बिंदायक्या , सिद्ध सेठी , अनिता बिंदायक्या , सहित बहुत से गणमान्य साहित्य प्रेमियों की गरिमाममी उपस्थिति रही,कार्यक्रम का व्यवस्थित संचालन नरेश जैन व इन्द्रा बडजात्या द्वारा किया गया,समारोह का समापन प्राकृत भाषा में जिनवाणी स्तुति व राष्ट्र गान से हुआ ।

राजाबाबू गोधा जैन गजट संवाददाता राजस्थान

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here