आचार्य श्री चंद्रगुप्त सागर गुरुदेव का डडूका में मंगल प्रवेश एवं विहार: मंगलकारी यादगार डडूका में गुरुदेव के वो बारह घंटे

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आचार्य श्री चंद्रगुप्त सागर गुरुदेव का डडूका में मंगल प्रवेश एवं विहार: मंगलकारी यादगार डडूका में गुरुदेव के वो बारह घंटे…………………………..
आचार्य गुप्ति नंदी जी एवं दादा गुरु वैज्ञानिक आचार्य श्री कनकनंदीजी के सुशिष्य आचार्य श्री चंद्रगुप्त सागर जी का डडूका में शाम को मंगल प्रवेश ओर प्रातः विहार के क्षण डडूका जैन समाज कभी नहीं भूल पाएगा। जोलाना से विहार कर जब गुरुदेव डडूका पहुंचे तो समाजजनों, जैन युवा समिति सदस्यों ओर दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चों ने प्रारंभिक बैंड वादन के साथ उनकी अगवानी की। जिनालय में दर्शन के तुरंत बाद आचार्य श्री चंद्रगुप्तसागर महाराज ने जो म्यूजिकल प्रवचन दिया वो डडूकावासियों के मन में हमेशा के लिए छा गया। गुरुदेव ने कहा की दर्शन करने से पापों का नाश होता है, आत्म विश्वास मजबूत होता है। मंदिर की मूर्तिया जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिकृतियां है, उनमें श्रद्धा करके ही हम जिनेन्द्रमय हो आने वाले दो तीन भवों में स्वर्ग और मोक्ष गामी जीव बन सकते है। मूलतः चितरी जिला डूंगरपुर में जन्मे गुरुदेव ने जब वागड़ी में कुछ उलाहने दिए तो भक्त भाव विभोर हो गये। क्योंकि जैन साधु रात को बोलते नही है तो उसकी पूर्ति युवाओं ने उनके सान्निध्य में भक्ति गीत गाकर पूरी की।
प्रातः जब गुरुदेव का आदिनाथ कॉलोनी के लिए विहार हुआ तो हर भक्त गुरुदेव के साथ बीते 12 घंटों को यादकर चहक रहा था। विहार से पूर्व जगह जगह पाद प्रक्षालन कर भक्तों ने आचार्य श्री को संसंघ भाव भीनी विदाई दी।

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