*जैन समाज का भव्य आयोजन*
नागपुर : श्री पार्श्वप्रभु दिगंबर जैन सैतवाल मंदिर संस्था इतवारी नागपुर और श्री सैतवाल जैन संगठन मंडल महावीरनगर नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में जैन धर्म के सर्वोच्च संत तीर्थरक्षा शिरोमणी आचार्यश्री आर्यनंदीजी गुरुदेव के 118 वें जन्म जयंती समारोह का आयोजन रविवार को इतवारी शहीद चौक भगवान पार्श्वनाथ स्वामी मार्ग स्थित श्री पार्श्वप्रभु दिगंबर जैन सैतवाल मंदिर के बाहुबली भवन सभागृह में किया गया था। इसके पूर्व भव्य प्रभातफेरी इतवारी शहीद चौक से प्रारंभ होकर वंदेमातरम चौक, अहिंसा भवन, निकालस मंदिर रोड, दारोडकर चौक, सेंट्रल एवेन्यू, गांधी पुतला, न्यू इतवारी रोड, टांगा स्टैंड चौक, शहीद चौक होते हुए भगवान पार्श्वनाथ स्वामी मार्ग स्थित श्री पार्श्वप्रभु दिगंबर जैन सैतवाल मंदिर में पहुंची। प्रभातफेरी में हमारी पाठशाला उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लेझिम नृत्य स्कूल संचालक राजेंद्र नखाते के नेतृत्व में किया वह आकर्षण का केंद्र था। बग्घी पर आचार्यश्री आर्यनंदीजी गुरुदेव का फोटो था। महिलाएं भजन गाते हुए चल रही थी। मंदिर में पहुंचने के बाद गुरुदेव का अष्टक पूजन पं. अजीत कहाते के मार्गदर्शन में किया गया। ऋषभ आगरकर के संगीत निर्देशन में संगीतमय पूजन संपन्न हुआ। इस पूजन में श्री पार्श्वप्रभु दिगंबर जैन सैतवाल मंदिर संस्था, श्री सैतवाल जैन संगठन मंडल, युवा और महिला शाखा, अखिल दिगंबर जैन सैतवाल संस्था, श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर बाहुबलीनगर, श्री आदिनाथ दिगंबर जैन सैतवाल मंदिर अंबानगर, श्री दिगंबर जैन युवक मंडल (सैतवाल) और महिला शाखा, अखिल भारतीय पुलक मंच परिवार नागपुर की सभी शाखाएं, महावीर यूथ क्लब, श्री जैन सहायता ट्रस्ट, सकल जैन समाज के सभी सदस्यों ने पूजन में सहभाग लिया।
इस अवसरपर संबोधित करते हुए अखिल दिगंबर जैन सैतवाल संस्था के राष्ट्रीय महामंत्री नितिन नखाते ने कहा आचार्यश्री आर्यनंदीजी गुरुदेव ने तीर्थों की रक्षा के लिए पैंतीस हजार किलोमीटर का अपने जीवन में पदविहार किया। तीर्थों की रक्षा के लिए बहुत बड़ा काम किया, उनके इस उपकार को हम कभी भूल नहीं सकते। तीर्थ बचेगा तो जैन धर्म बचेगा। गुरुदेव का जीवन हमें प्रेरणा देता हैं। गुरुदेव के विचारों से स्वयं का कल्याण तो होगा और समाज का कल्याण होगा। गुरुदेव ने तीर्थरक्षा के लिए चीनी और घी का त्याग किया था। गुरुदेव महात्मा गांधी के साक्षरता अभियान से जुड़े थे। 1990 में आचार्यश्री आर्यनंदीजी गुरुदेव को स्व. सुंदरसाव शिवनकर के नेतृत्व में भव्य समारोह में चतुर्थ पट्टाचार्य की उपाधि से विभूषित किया था। इस अवसरपर डॉ. नरेंद्र भुसारी ने गुरुदेव के जीवन की यादें ताजा की। समारोह का संचालन मंदिर के अध्यक्ष दिलीप राखे ने किया।
समारोह प्रमुखता से चंद्रकांत वेखंडे, सतीश जैन पेंढारी, प्रशांत भुसारी, राजेंद्र बंड, मनोज बंड, सूरज जैन पेंढारी, दिलीप शिवनकर, पवन झांझरी, राजेंद्र सोनटक्के, आनंदराव नखाते, सुधीर सिनगारे, मनीष पिंजरकर, विलास गिल्लरकर, ऋषभ आगरकर, जितेंद्र गडेकर, नरेश मचाले, प्रशांत मानेकर, दिनेश सावलकर, सुभाष मचाले, प्रशांत सवाने, श्रीकांत मानेकर, विशाल चानेकर, अमोल भुसारी, नीरज पलसापुरे, राजेश गडेकर, डॉ. रवींद्र भुसारी, अविनाश शहाकार, दिलीप सावलकर, मनुकांत गडेकर, रमेश तुपकर, सुरेश वरुडकर राजेश जैन, मनोज मांडवगडे, श्रीकांत तुपकर, विनोद गिल्लरकर, शैलेश काटोलकर, मधुकर नखाते,चंद्रकांत सावलकर, वैशाली नखाते, दीपाली राखे, उज्ज्वला आगरकर, प्रीति महाजन, प्रतिभा सचिन नखाते, माया सावलकर, भारती उबाले, सरिता सावलकर, अर्चना गडेकर , हेमलता जैन, सुनंदा मचाले, वंदना मखे, अर्चना नखाते, प्रणिता मानेकर आदि उपस्थित थे।