मुनि श्री समत्व सागर जी, मूल नाम अंकुर जैन, का जन्म 31 मई 1984 को जबलपुर में हुआ था, जिन्होंने उच्च शिक्षा और विदेश में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ने के बाद आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी से 8 नवंबर 2011 को दीक्षा ग्रहण की। वह एक निस्पृह साधक हैं, जिनका जीवन मोक्ष मार्ग को समर्पित है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जन्म:
31 मई 1984 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में।
पूर्व नाम:
अंकुर जैन।
शिक्षा:
गारसपुर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद विदिशा से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, और बाद में बिट्स पिलानी से एमटेक किया।
सांसारिक जीवन:
हैदराबाद की एक कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम किया और लगभग ₹20 लाख का वेतन अर्जित किया।
दीक्षा और आध्यात्मिक यात्रा
दीक्षा:
8 नवंबर 2011 को आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज से दीक्षा प्राप्त की।
जीवन का मार्ग:
सांसारिक सुखों और विदेश की नौकरी को त्यागकर मोक्ष मार्ग को अपनाया।
वर्तमान स्थिति:
आप आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के संघ में साधनारत हैं और एक निस्पृह एवं सरल स्वभावी साधक हैं।
वर्तमान में आपका चातुर्मास सागर जिले की शाहगढ़ तहसील में चल रहा है।
योगेश जैन संवाददाता टीकमगढ़
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