आर्यिका 105 विकाम्या श्री एवं विगुंजन श्री की परिकल्पना आज साकार होते नजर आयी जब आज प्रातः अभिजीत शुभ मुहूर्त मे 24 तीर्थकर की स्फटिक मणि की प्रतिमाए एवं 458 अकृतिम जिनालय,चन्दप्रभु मुलनायक की पाषाण एव पार्श्वनाथ,आदिनाथ शांति नाथ की पंच धातु की प्रतिमाये,वेदी पर विराजमान की गयीं।
इससे पूर्व वेदी प्रतिष्ठा एवं वास्तु विधान संपन्न किया गया।आचार्य विराग सागर महाराज के संघ की आर्यिका विशिष्ट मति माताजी सहित पूरा संघ एवं सोधर्म इंद्र सहित सम्पूर्ण इन्द्र परिवार इस अयोजन मे सम्मिलित हुए।नवीन जिनालय का उद्घाटन अशोक कोठिया,सरिता बदामी लाल,कमला देवी दिशांत एवं शुभि कोठिया परिवार द्वारा किया गया।एक एक करके सभी 24 लाभार्थियों ने जिनबिंब को वेदी पर स्थापित किया गया।इससे पूर्व पांडाल से रजतरथ से सभी प्रतिमाओ को ह्रीकार तीर्थ आगमन हुआ,सभी संतो की अहार चर्या क्षेत्र पर ही संपन्न हुई।वात्सल्य सेवार्थ फाउंडेशन के नव निर्वाचित अध्यक्ष ने बताया की ह्रींकार तीर्थ के कार्य को शीघ्र पूर्ण कर इस क्षेत्र को धार्मिक,आध्यात्मिक एवं धार्मिक पर्यटन के दृष्टि से विकसित किया जायेगा।

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