मुरैना (मनोज जैन नायक) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में शुभ कार्यों को करना वर्जित बताया गया है ।
वर्ष में कुछ विशेष समय अवधि ऐसी आती हैं जिसमें पंचांग के अनुसार कई कार्यों का करना निषेध माना गया है उनमें से होलाष्टक भी एक है।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि होलाष्टक फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक की अवधि को माना जाता है । इस बार ये 24 फरवरी मंगलवार से प्रारंभ हो कर 03 मार्च मंगलवार को होलिका दहन पश्चात समाप्त होंगे।
होलाष्टक को अशुभ प्रभाव वाला समय माना जाता है, इसलिए शुभ कार्य एवं मांगलिक कार्य टालना चाहिए । जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, जनेऊ/धागा संस्कार, गृहशांति एवं शुभ पूजन (हवन, यज्ञ आदि), नया व्यवसाय या नौकरी शुरू करना,
जमीन/घर/वाहन खरीदना, मेहँदी, मुंडन या अन्य संस्कार, नई चीज़ों की खरीदारी, बाल काटना, नाखून काटना आदि परंपरागत तौर पर वर्जित माना जाता है । क्योंकि ग्रहों की स्थिति को अस्थिर और नकारात्मक माना जाता है।
होलाष्टक में क्या किया जा सकता है?
हालाँकि शुभ कार्य टाले जाते हैं, लेकिन भगवान की पूजा-अराधना, मंत्र जप, धार्मिक और आत्मिक अभ्यास (ध्यान, साधना) जरूरतमंदों को दान देना (भोजन, कपड़े, पैसे) स्व-शुद्धि का प्रयास (संतोष, संयम, दया) भक्ति पाठ
पूजा-पाठ और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय ग्रहों की ऊर्जा अस्थिर/ उग्र मानी जाती है, जिसके कारण किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य में विघ्न या बाधा आ सकती है और उसके स्थाई रूप से सफल होने की उम्मीद नहीं होती।

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