शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी की पावन धरा पर अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य वसुनंदी महाराज का हुआ भक्ति मय मंगल प्रवेश विभिन्न प्रान्तों से आये हजारों भक्तों ने मधुवन में की भावपूर्ण आगवानी सिंधु से बिंदु का मिलन देख भावुक हुए उपस्थित भक्त

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(मधुवन){संजय जैन बड़जात्या}शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी की पावन धरा पर सोमवार 13 अप्रैल को प्रातः शुभ मंगलमय बेला में परम पूज्य अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी अक्षर शिल्पी आचार्य श्री वसु नंदी महा मुनिराज ससंघ का भव्य दिव्य मंगल प्रवेश हुआ। हजारों भक्त श्रद्धा व भक्ति से झूम उठे तो वही पूर्व में विराजित सुशिष्य, मुनिराजों,अन्य सन्तों व आर्यिका माताजीयों ने गुरुवर की आगवानी की।
सिंधु से बिंदु का मिलन धर्म जागृति संस्थान के राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संजय जैन बड़जात्या कामां ने बताया अपने गुरुवर से जब उनके शिष्य मिले तो गुरु का भी प्रेम शिष्यों के प्रति उमड़ पड़ा और उन्हें गले लगाकर स्नेह प्रदान किया। ऐसा लगा कि सिंधु से बिंदु का मिलन हो रहा है और यह हमारे सजल नेत्र स्वयं को सौभाग्यशाली समझ रहे थे जो इस दृश्य को देख रहे हैं। जैसे ही सिद्धायतन से तेरह पंथी की ओर गुरुवर के कदम बढ़ने लगे वैसे ही अनेकों प्रान्तों से पधारे भक्त जगह जगह गुरुवर की पाद प्रक्षालन व आरती के लिए उमड़ पड़े। सभी ने भक्ति भाव से सम्पूर्ण संघ का मंगल प्रवेश कराया। उस अवसर पर धर्म जागृति संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी राजस्थान, हरियाणा,उत्तर प्रदेश व दिल्ली की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे गिरिडीह जैन समाज के साथ-साथ तेरापंथ कोठी कार्यकारिणी ने भव्य आगवानी की।
108 मीटर लम्बा पंचरंगा ध्वज अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान युवा प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी,जम्बू स्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा के साथ स्थानीय समितियों के द्वारा 108 मीटर लंबे पचरंगा झंडा की यात्रा भी मंगल प्रवेश के समय आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर जगह जगह पाद प्रक्षालन आरती की गई। वही 108 पात्रों में आचार्य का गुरुभक्तों ने मंगल कलशों से पाद प्रक्षालन किया। इस अवसर पर आचार्य सम्भव सागर महाराज,आचार्य वैराग्य नंदी महाराज,आचार्य ज्ञेय सागर महाराज,आचार्य सच्चिदानंद महाराज,गणिनी आर्यिका शुभमती माताजी,उपाध्यक्ष वृषानंद महाराज ससंघ से अद्धभुत मिलन हुआ। ऐसा लगा मानो समवसरण धरा पर उतर आया हो।
धर्म सभा का हुआ आयोजन तेरा पंथी कोठी के प्रवचन हाल में धर्म सभा का शुभारम्भ आर्यिका वर्धस्व नंदनी माताजी के मंगलाचरन के साथ हुआ।मुनि शिवानंद महाराज ने कहा हमारा कर्तव्य है कि हम शाश्वत तीर्थ की रक्षा के लिए सजग रहे हैं उसके साथ ही शाश्वत तीर्थ पर प्रकृति को भी बचाने का कार्य हमें करना चाहिए। धर्म जागृति संस्थान ने जैन हैं तो जैन लिखाए का आह्वान भी किया। कार्यक्रम में मुनि आराध्य सागर महाराज,आर्यिका पुनीत चैतन्य मति माताजी ने भी अपने विचार प्रकट किए। संचालन मनोज जैन शास्त्री,संजय शास्त्री व शैलेन्द्र जैन द्वारा किया गया। आचार्य श्री वसुनंदी महाराज ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह शाश्वत तीर्थ है जहाँ के कण कण में अद्धभुत शक्ति का समावेश है हम सबको पर्वत के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता व प्राकृतिक कारण का ध्यान रखना चाहिए और यह हमारा कर्तव्य है कि हम तीर्थराज सम्मेद शिखर के लिए श्रद्धा भक्ति और भावना से समर्पित रहे। पाद प्रक्षालन राजा भाई सूरत,किरीट भाई दोषी मुंबई ने किया तो शास्त्र भेंट नरेश जैन नरेंद्र जैन तिजारा,पवन चौधरी अलवर द्वारा किया गया। विनोद जैन मिलेनियम,रमेश गर्ग बोलखेड़ा,पदम जैन बिलाला जयपुर,अरुण जैन किशोर जैन डीग,इंजी भूपेंद्र जैन,संजय जैन बड़जात्या,पंकज जैन सहित राजस्थान, हरियाणा दिल्ली, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र व गुजरात के भक्त भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। तेरा पंथी कोठी मधुबन पदाधिकारी यों अजित जैन पांड्या अध्यक्ष,विनीत जैन झांझरी,संतोष सेठी कोषाध्यक्ष पीयूष जैन सहकोषाध्यक्ष,पवन ठोल्या,सत्येंद्र जैन गोपाल जैन सरावगी द्वारा अथितियों का अभिनंदन भी किया गया। इस मौके पर हजारों श्रावक व श्राविकाएं विभिन्न परिधानों में उपस्थित रही।

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