वर्ष 2007 में आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज का आचार्य पद ग्रहण करने के पश्चात सर्वप्रथम इंदौर नगर में शुभागमन हुआऔर बुंदेलखंड बहुल क्षेत्र छत्रपति नगर में उनका वर्षायोग स्थापित हुआ था तब आचार्य श्री के संघ में आचार्य श्री के साथ ऐलक के रूप में संघस्थ थे मनोज्ञ सागर जी। आचार्यश्री के वर्षायोग निष्ठापन के पश्चात आचार्य श्री ने छत्रपति नगर के दलाल बाग में मनोज्ञसागरजी को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान कर मुनि मनोज्ञ सागर बना दिया जिसकी स्मृति हजारों लोगों के हृदय पटल पर अंकित है।
आप पिछले काफी समय से अस्वस्थ थे और शिखरजी में साधनारत थै। उनकी सल्लेखना समाधि से हम संतप्त हैं और उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करते हैं ।
ओम शांति
– डॉ जैनेंद्र जैन, राजेश जैन दद्दू
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