नैनागिरी में 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला सानंद सम्पन्न, प्राकृत प्रज्ञा प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

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नैनागिरी (छतरपुर)। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का समापन समारोह दिनांक 14 जनवरी 2024 को श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिरी में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृत भाषा के अध्ययन, अध्यापन, शोध तथा जन-जागरूकता को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के संरक्षक श्री सुरेश जैन (आईएएस) एवं न्यायमूर्ति श्रीमती विमला जैन रहीं। समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री संतोष जैन घड़ी एवं श्री संतोष जैन बैटरी रहे, जबकि अध्यक्षता प्रो. रमाकांत पांडे, निदेशक, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर ने की।प्रो ऋषभ जैन फौजदार दमोह द्वारा ने कहा – प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन ने सदा प्राकृत भाषा के लिए कार्य करने के लिए कार्य करती रहेगी।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रमाकांत पांडे ने प्राकृत भाषा को भारतीय ज्ञान-परंपरा की मूल संवाहक बताते हुए कहा कि जैन आगम, दर्शन और साहित्य को समझने में प्राकृत का विशेष स्थान है। मुख्य अतिथियों ने कार्यशाला के सफल आयोजन की सराहना करते हुए प्रतिभागियों से अर्जित ज्ञान को समाज तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर श्री सुनील देव जी सागर (क्षेत्र समरसता संयोजक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), श्री मनोज पांडे (प्रांत मंत्री, संस्कृत भारती, जबलपुर), श्री विनोद जैन रजवास, विद्वान श्री विनोद जैन सहित अनेक विद्वान, शिक्षाविद् एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यशाला का समन्वयक डॉ धर्मेंद्र कुमार जैन ने कार्यशाला के आयोजन में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाई। प्रो जगतराम भट्टाचार्य कोलकाता, डॉ प्रभात कुमार दास, डॉ सतेंद्र कुमार जैन, डॉ सुमत कुमार जैन उदयपुर, डॉ कमलेश जैन जयपुर द्वारा कुशल अध्यापन कराया गया। प्रो फूलचंद जैन प्रेमी के रिकॉर्डेड प्राकृत वक्तव्य को भी सुनाया गया। डा आशीष कुमार जैन बम्होरी ने प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन का परिचय दिया एवं फाउंडेशन की गति विधियों से अवगत कराया, कार्यक्रम का सशक्त एवं प्रभावी संचालन डॉ सोनल जैन (दिल्ली) द्वारा किया गया।
कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित प्राकृत प्रज्ञा प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसका आयोजन सुदूर अंचलों तक किया गया। प्रतियोगिता के संयोजक डॉ राजेश जैन शास्त्री, अरुण जैन शास्त्री, अनिल जैन शास्त्री एवं विजय जैन शास्त्री रहे।डॉ हरिश्चंद जैन सागर, डॉ निर्मल जैन टीकमगढ़ , सुनील जैन शास्त्री बड़ागांव, राजकुमार जैन शास्त्री सागर, उदयचंद जैन शास्त्री सागर आदि विद्वानों का समागम प्राप्त हुआ। समापन समारोह में प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा कर विजेताओं को सम्मानित किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संयोजन डॉ आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़) द्वारा किया गया। आयोजकों ने इसे प्राकृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में टीकमगढ़, शाहगढ़, बम्होरी, सागर, बक्सवाहा, बंडा, बारायठा, अमरमऊ, मद्देवरा, हीरापुरा आदि स्थानों से अनेक महानुभाव पधारें। क्षेत्र के मंत्री श्री देवेंद्र जी लुहारी, श्री मनीष जैन बम्होरी, श्री अशोक जैन बम्होरी, श्री जिनेश जैन बहरोल आदि महानुभाव की गरिमामय उपस्थिति रही। श्री राजेश जैन रागी बक्सवाहा द्वारा जानकारी प्रदान की गई।

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