धार्मिक धरोहर पर प्रहार: विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने जताया कड़ा रोश

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छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के जटवाड़ा में स्थित श्री 108 संकटहर दिगंबर जैन मंदिर की 400 साल पुरानी ऐतिहासिक सुरंग को मिट्टी और पत्थरों से बंद करने की घटना ने अब राष्ट्रव्यापी तूल पकड़ लिया है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मंयक जैन एवं प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे जैन धर्म की प्राचीन विरासत को मिटाने का षड्यंत्र करार दिया है। भारत वर्षीय सकल जैन समाज ने इस घटनाक्रम पर रोश व्यक्त करते हुए विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के पदाधिकारियों ने बयान जारी कर इस घटना को ‘लैंड जिहाद’ और धार्मिक भावनाओं पर सीधा प्रहार बताया है। संगठनों का कहना है कि जिस सुरंग से तीर्थंकर भगवान की 21 अतिशयकारी प्रतिमाएं प्राप्त हुई थीं, उसे असामाजिक तत्वों द्वारा बंद करना जैन समाज की जड़ों पर हमला है। विभिन्न संगठनों ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नामजद आरोपियों (शेख मुस्ताक, शेख सत्तार व अन्य) के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन केवल जटवाड़ा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देशभर में ले जाया जाएगा।
प्रमुख मांगें:
* दोषियों की गिरफ्तारी: मंदिर की संपत्ति और सुरंग को नुकसान पहुँचाने वाले आरोपियों को तुरंत जेल भेजा जाए।
* सुरंग की बहाली: ऐतिहासिक सुरंग से मलबा हटाकर उसे पुरातत्व विभाग की देखरेख में सुरक्षित किया जाए।
* सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम: मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी हिमाकत न हो सके।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनीत और सचिव प्रमोद हंसराज पांडे और विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जैन समाज अहिंसक है, लेकिन अपनी धार्मिक धरोहरों संस्कृति की सुरक्षा के लिए पीछे नहीं हटेगा। यदि प्रशासन ने दो दिनों के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, तो भारत वर्षीय सकल समाज का विरोध झेलना पड़ेगा।
– राजेश जैन दद्दू
इंदौर

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