पटेरिया जी में दिव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव 16से 21मार्च 2026तक*
गढ़ाकोटा (सागर)।
त्याग, तपस्या, श्रद्धा और अतिशय चमत्कारों की पुण्यभूमि गढ़ाकोटा एक बार फिर धर्म इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ में अपना नाम अंकित करने जा रही है। 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी के अतिशय से आच्छादित, विश्वविख्यात अतिशय क्षेत्र पटेरिया जी में 244 वर्षों के दीर्घ अंतराल के पश्चात भव्य एवं दिव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन 16 मार्च से 21 मार्च 2026 तक होने जा रहा है।
यह ऐतिहासिक आयोजन चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य व सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठाचार्य ब्र.जय निशांत टीकमगढ़ ,पंडित सनत कुमार विनोद कुमार जैन रंजवास द्वारा सम्पन्न होगा। अनेक लौकिक अतिशयों से युक्त, त्यागी मुनियों की तपोभूमि रही गढ़ाकोटा नगरी को यह महासंयोग पच्चीस दशकों बाद प्राप्त हो रहा है, जिससे सम्पूर्ण जैन समाज में अपूर्व हर्ष, उल्लास और धर्ममय वातावरण व्याप्त है।
पात्र चयन कार्यक्रम सम्पन्न, गढ़ाकोटा को मिला विशेष गौरव
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री सोम्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री जयेंद्र सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 4 जनवरी 2026 को पंचकल्याणक हेतु पात्र चयन कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा और भावनात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर गढ़ाकोटा के श्री सुनील सेठ को सौधर्म इन्द्र एवं श्रीमती रजनी सेठ को शची इन्द्राणी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
भगवान के माता–पिता के रूप में डॉ. सुरेश सिंघई एवं श्रीमती सुषमा सिंघई,
कुबेर इन्द्र के रूप में श्री सुशील सेठ एवं श्रीमती मंजू सेठ,
महायज्ञनायक के रूप में श्री आशीष चौधरी सहित अनेक पात्रों का चयन बोलियों के माध्यम से हुआ।
विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि सभी प्रमुख पात्र गढ़ाकोटा नगर से ही चयनित हुए हैं, जो नगर के धार्मिक सौभाग्य और एकजुटता को दर्शाता है।
ध्वजारोहण कर्ता के रूप में श्री सुरेन्द्र कुमार बहरोल वाले रहेंगे।
एक दिन की रूई की कमाई से बना चमत्कारी मंदिर
अतिशय क्षेत्र पटेरिया जी केवल अपने चमत्कारों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अद्भुत निर्माण इतिहास के लिए भी सम्पूर्ण जैन समाज में प्रसिद्ध है। लगभग 240 वर्ष पूर्व, इस पावन पार्श्वनाथ मंदिर का निर्माण मोहनदास राम किशुन शाह ने रूई के व्यापार में मात्र एक दिन के मुनाफे से कराया था। यह घटना स्वयं में त्याग, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
भगवान पार्श्वनाथ जी की तीन पद्मासन प्रतिमाएँ समय–समय पर अपने चमत्कारी अतिशयों से श्रद्धालुओं की आस्था को दृढ़ करती रही हैं। क्षेत्र कमेटी के सेठ आदेश के अनुसार, गढ़ाकोटा नगर का यह परम सौभाग्य है कि उसकी धरती पर ऐसा चमत्कारी अतिशय क्षेत्र विराजमान है।
मुनि संघ के प्रवास से तीर्थ को मिला नवजीवन
मुनि श्री क्षमासागर जी एवं मुनि श्री गुप्तिसागर जी महाराज के चातुर्मास उपरांत यह तीर्थ तीव्र विकास की ओर अग्रसर हुआ है। गढ़ाकोटा से मात्र 2 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र रहली–पटना गंज एवं कुण्डलपुर के मध्य स्थित होने से देशभर के श्रद्धालुओं के लिए सहज पहुँच में है।
क्षेत्र पर सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला, भोजनशाला एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं, जिससे दूर–दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को पूर्ण सुविधा प्राप्त हो सके।
पंचकल्याणक हेतु पूर्णतः तैयार पटेरिया जी
क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष विमल चौधरी एवं महामंत्री महेन्द्र सेठ कोषाध्यक्ष आदेश सेठ ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव को लेकर सम्पूर्ण क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण है। हर घर में उत्साह, हर मन में धर्मभाव और हर तन–मन से सेवा का संकल्प दिखाई दे रहा है।
मुनि संघ के दीर्घ प्रवास से समाज में अद्भुत एकजुटता देखने को मिल रही है। शासन–प्रशासन के पूर्ण सहयोग के साथ–साथ स्थानीय विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। क्षेत्र कमेटी व पंचकल्याणक कमेटी अध्यक्ष सुनील सेठ महामंत्री सुशील सेठ कोषाध्यक्ष रजनीश सिंघई,संयोजक आशीष चौधरी ने सम्पूर्ण देश के श्रद्धालुओं से भावपूर्ण अपील की है कि वे इस दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव में पधारकर धर्मलाभ अर्जित करें और इस पुण्य अवसर के साक्षी बनें।















