आज लगभग 2500 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुवे जैन संत उपाध्याय श्री 108 बृषभानंद जी मुनिराज का भब्य मंगल प्रवेश झुमरीतिलैया में हुवा।

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झुमरीतिलैया-आज प्रातः * परम पूज्य आचार्य श्री 108 बसूनन्दी जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री बृषभानंद जी मुनिराज ससंघ ( चार पिच्छी धारी मुनिराज ) का भब्य मंगल प्रवेश कोडरमा में हुवा ।ज्ञात हो कि मुनिराज ससंघ का मंगल चातुर्मास जयपुर में हुवा था वहाँ से दिपावली के बाद पैदल मंगल विहार करते हुवे दिल्ली,इलाहाबाद,मथुरा,अयोध्या, बनारस ,राजगीर,पावापुरी होते हुवे यहाँ मंगल प्रवेश हुवा पूरा ससंघ लगभग 2500 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुवे यहाँ पहुँचे है ये श्री दिगम्बर जैन समाज कोडरमा का सौभाग्य है कि ऐसे तपस्वी जैन संत का मंगल चरण यहाँ पड़े है महाराज श्री की अगवानी शहर के मुख्य द्वार से बैंड बाजा महिलाओं द्वारा मंगल कलश ओर पंचरंगा झंडा लेकर सभी ने गुरु संघ की अगवानी की। साथ ही संघ के द्वारा 108 फिट का पंचरंगा झंडा लेकर पूरे नगर भ्रमण कर बड़ा जैन मंदिर जी पहुँचे जहाँ सर्व प्रथम 1008 चंद प्रभु भगवान का मस्तिकाभिषेक हुवा ओर शांतिधारा गुरु मुख से ओर चन्द्रप्रभु भगवान का निर्वाण लड्डू अशोक बिनोद अर्हम कथान्स अजमेरा,सुरेंद्र-सरिता जैन काला के द्वारा चढ़ाया गया।।तत्पश्चात पूरे मंदिर का दर्शन कर सरस्वती भवन पहुचे जहाँ समाज के द्वारा साथ मे चल रहे भक्तों का आभार समाज के सह मंत्री राज जैन छाबड़ा ने किया ।इसके पश्चात मुनि श्री 108 शिवानंद की मुनिराज ने अपने उदगार ब्यक्त करते हुवे बताया कि यहाँ के सभी भक्तों में गुरु के प्रति समर्पित भाव दिखा जो 50 किलोमीटर से ही गुरु के साथ कदम से कदम मिलाकर पैदल चल रहे है उपाध्याय श्री 108 बृषभानंद जी मुनिराज ने कहा कि धर्म जीवन जीने की कला सिखाता है मानव से महान,महान से महात्मा ,महात्मा से परमात्मा तक की सारी यात्रा करता है ये संत समागम है।संत का मतलब यही होता है जो हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है ।सत् अर्थात् सच्चा,सत् मतलब अच्छा ,सत् माने सम्यक,सत् माने समीचीन ,सत् माने सत्य ,सत् साथ ,सत् समागम,सत् माने सन्ननिधी अर्थात् जो हमें संतों के पास ले जाता है ,सत्य के पास ले जाता है सन्मार्ग पर ले जाता है सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जो संत जीवन में भावना भर देता है उसका नाम है जैन संत ।हम यहाँ पर आज उसी प्रवचन को जीवन में स्वामित्व करने के लिए उपस्थित हुए है ।
पू . गुरुदेव ने अपने उद्बोधन में कहा कि सबसे बड़ी पूजा क्या है ? समय का सम्मान करना ,जिसने समय का सम्मान किया है उसने आत्मा की पूजा की है जितने भी आज तक में महान बने है या आगे बनेगे वो सब समय को समझ करके महान बने है । समाज के सभी पुरुष और महिला इस कार्यक्रम में बहुत संख्या में शामिल हुए ।मंच संचालन स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री ने किया।इस संघ के संघपति हिमांशु जैन,फरीदाबाद साथ साथ चलकर संघ की पूरी ब्यवस्था को देख रहे है।आज संध्या में 48 मंडलीय ओर दीपको से भक्तामर का आयोजन होगा उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा,नवीन जैन ने दी।

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