नई दिल्लीः विश्व शांति केंद्र गुरूग्राम के संस्थापक प्रमुख जैनाचार्य डा. लोकेश मुनि के सान्निध्य में केंद्र के लिए भारत मंडपम के विशाल और भव्य सभागार में विश्वविख्यात कथा वाचक पूज्य मोरारी बापू की 9 दिन की भव्य राम कथा का आयोजन 25 जनवरी को संपन्न हुआ। मोरारी बापू ने सभी धर्मों के प्रति पूर्ण सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि राम की सार्वभौमिकता उनके आदर्शों और रामायण की शिक्षाओं में निहित है, जो उन्हें सांस्कृतिक और भौगोलिक सीमाओं से परे एक वैश्विक प्रतीक बनाती है | उन्होने प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और भगवान महावीर तथा जैन धर्म की प्राचीनता व महानता का उल्लेख भी किया।
रामायण का मार्मिक सार बताते हुए बापू ने कहा कि रामायण हमें गतिशील, गर्वशील, गुरूशील, गुणशील, धैर्यशील और शौर्यशील बनने की प्रेरणा देते हुए जीवन में अहिंसा, ब्रह्मचर्य, त्याग, स्वाध्याय, सरलता, सहजता, पुरूषार्थ, समदृष्टि धारण करने की प्रेरणा देती है।
बापू ने अत्यंत मार्मिक शब्दों में सभी धर्मों का सार बताते हुए कहा कि सनातन धर्म का दर्शन अदभुत और अविरल है, मानस हमें सिखाती है कि जीवन के आदि, मध्य और अंत में प्रेम ही प्रेम है। ओम, स्वास्तिक, कमल, शंख, नटराज, रूद्राक्ष, धर्मचक्र, नंदी, सुदर्शन चक्र, अक्षय, तिलक, हंस, तुलसी, नमस्कार मुद्रा आदि सभी सनातन की महानता और प्रधानता के प्रतीक हैं। सारा विश्व एक नीड, घौंसला या आशियाना है यहां निःस्वार्थ सेवा ही धर्म का सार और रस है।
आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कहा कि श्रीराम भारत की अस्मिता के प्रतीक हैं, वे कोटि कोटि लोगों की आस्था के केंद्र है, राम के जीवन चरित्र और भगवान महावीर के संदेश के माध्यम से ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। यह आयोजन युवा पीढ़ी को संस्कार निर्माण चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व निर्माण में सहायक बनेगा| कथा के माध्यम से वसुधैव कुटुंबकम, करुणा, शांति, सद्भावना, प्रेम, मानवता का संदेश समस्त विश्व में प्रसारित होगा और विश्व शांति स्थापित
करने की दिशा में ऐतिहासिक होगा।
समापन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने विनयांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन द्वारा उदघाटित भव्य कथा आयोजन में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने अपना एक माह का वेतन विश्व शांति केंद्र को दान करने की घोषणा की। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, रूसी दूतावास के सचिव मिखाइल एंटीफेरो, सांसद मनोज तिवारी, पंजाब केसरी की चेयरपर्सन किरण चोपडा,
लोकमत के चेयरमैन विजय दर्डा, मनोज जैन -निगम पार्षद, कर्नल टीपी त्यागी, सांसद पुरुषोत्तम रूपाला, श्याम जाजू, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह के अलावा पंडित धीरेंद्र शास्त्री, आचार्य पुंडरीक गोस्वामी, चिन्मय बापू, आचार्य अभयदास, इमाम उमेर अहमद इलियासी, बौद्ध भिक्षु संघसेना, परमजीत सिंह चंडोक, महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी, देवी चित्रलेखा, योगाचार्य मनीषजी, राजेश्वर गुरू-लंदन, संजीव कृष्ण ठाकुर, स्वामी शैलेंद्र, गोविंददेव गिरि आदि अनेक धर्मों के संतों ने भी भाग लिया। सभी संतों ने एकसाथ भारत की अनेकता में एकता की परंपरा को जीवंत कर दिया।
– रमेश चंद्र जैन ए़डवोकेट नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली

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