तीर्थों की बंदना से मन पावन, पवित्र व निर्मल होता – गोकुलचंद जैन श्री शांतिनाथ सेवा संघ तीर्थ यात्रा महोत्सव का द्वितीय दिन

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मुरैना (मनोज जैन नायक) तीर्थ क्षेत्रों की वंदना करने से मन पावन, पवित्र व निर्मल हो जाता है । सौभाग्यशाली, पुण्यशाली मनुष्यों को ही तीर्थों की वंदना करने का अवसर मिलता है । जब कभी भी हमें तीर्थों की बंदना करने का अवसर मिले तो हमें उसका पूरा लाभ उठाना चाहिए । तीर्थों की वंदना करने से हमारे अंतरंग में संयम साधना के बीज अंकुरित होते हैं। जिससे हमें वैराग्य के पथ पर चलने हेतु प्रोत्साहन मिलता है । सिद्धक्षेत्र, अतिशय क्षेत्र एवं अन्य पवित्र स्थानों का कण कण पवित्र होता है । उक्त उद्गार श्री शांतिनाथ सेवा संघ द्वारा आयोजित वार्षिक तीर्थयात्रा महोत्सव के पावन अवसर पर भगवान संभवनाथ स्वामी की जन्म स्थली श्रावस्ती में आयोजित सद्भावना संगोष्ठी में जैसवाल जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी, श्रावक श्रेष्ठी एवं तीर्थयात्रा मुख्य संयोजक गोकुलचंद जैन दिल्ली ने व्यक्त किए ।
सेवा भावी संस्था श्री शांतिनाथ सेवा संघ शकरपुर दिल्ली द्वारा आयोजित अयोध्या बनारस तीर्थयात्रा महोत्सव के मध्य श्रावस्ती में आयोजित सद्भावना संगोष्ठी में सेवा संघ के अध्यक्ष हरिश्चंद जैन ने सम्पूर्ण यात्रा की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए यात्रियों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया । उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रा करना और कराना पुण्य का काम हैं और शांतिनाथ सेवा संघ समाज के श्रावक श्रेष्ठियों के सहयोग से भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यों को करने के लिए प्रयासरत रहेगा । विधानाचार्य पंडित रमेशचंद जैन दिल्ली ने सद्भावना संगोष्ठी का संचालन करते हुए तीर्थ यात्राओं के महत्व पर प्रकाश डाला और उसके सार्थक परिणामों की जानकारी दी ।
श्री अयोध्या बनारस तीर्थयात्रा महोत्सव के द्वितीय दिन 621 तीर्थ यात्रियों के विशाल संघ ने 12 बसों के माध्यम से अयोध्या से भगवान संभवनाथ स्वामी की जन्म स्थली श्रावस्ती रवाना हुए । मुरैना के वरिष्ठ समाजसेवी एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज जैन नायक एवं वीरेंद्र कुमार जैन (मंदिर वाले) आगरा ने आयोजकों एवं अन्य श्रावक श्रेष्ठियों के साथ सभी 12 बसों की पचरंगीन ध्वजा दिखाकर रवाना किया । श्रावस्ती पहुंचकर सभी बंधुओं ने पूजा अर्चना, वंदना की । सभी ने पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति के साथ वहां पर समय व्यतीत किया । शाम को भगवान धर्मनाथ स्वामी की जन्म स्थली धर्मपुरी पहुंचकर पूज्यश्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर महाआरती की । महाआरती के समय यात्रा समूह के जय जय कारों से समूचा आभामंडप गुंजायमान हो उठा । महाआरती के पश्चात समूचा संघ बनारस की यात्रा पर रवाना हो गया ।

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