शराब पियो और मौत बुलाओ

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शराब से केंद्र और राज्य सरकारों को राजस्व आय होने से शराब पर पाबन्दी नहीं लगा सकती हैं ,इसके कई फायदे सरकार को हैं —राजस्व ,हॉस्पिटल ,डॉक्टर ,दवाइयां ,झगड़ा ,हत्याएं ,पुलिस ,वकील .जज ,कपड़ा व्यापारी ,श्मशान घाट के कर्मचारी ,मिठाई आदि बनाने वाले ,पंडित जी जिनको पूजा पाठ आदि का काम मिलता हैं .पेट्रोल ,रेलवे ,बस को भी फायदा होता हैं .शराब देश हित में जरुरी भी लगता हैं.

विश्व में शराब ,कबाब और शबाब का चलन सनातनी हैं और आगे भी चलता रहेगा .कारण ये व्यसन माने जाते हैं ,दूसरा बार इनकी आदत बहुत मुश्किल से छूटती हैं .दूसरा शराब की एक बून्द में हजारों जीव हिंसा होती हैं .मध्यपान करने वाला अपना विवेक खो देता हैं .वह नशे में अपनी माता ,पत्नी ,बहिन और पुत्री में विवेक नहीं रख पाता .नित्य समाचारों में यह जानकारी मिलती हैं की कोई भी अपराध ,हत्या ,पारिवारिक विवादों में ,मांसाहार होटल्स में शराबियों द्वारा झगड़ा होता हैं .और शराब की वशीभूत होकर जिंदगी भर कष्ट उठाना पड़ता हैं और कभी कभी जेल में पूरी जिंदगी बिताना पड़ती हैं . शराबी से कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहता और उन ऊपर कोई भरोसा नहीं करता .ये सामाजिक आर्थिक और व्यक्तिगत पहलु हैं .

दूसरा स्वास्थ्य के ऊपर विपरीत प्रभाव के कारण कई असाध्य बिमारियों से ग्रसित होने पर अपनी जिंदगी दुखों के साथ दवाओं,डॉक्टर ,हॉस्पिटल के चक्कर में धन की हानि के साथ पारिवारिक सुखों से वंचित होना पड़ता हैं .एक बार कैंसर जैसा असाध्य रोग से ग्रसित होने के बाद जिंदगी भर कमाया हुआ धन भी काम नहीं आता और और वह कम पड़ता हैं .कष्टों का कोई ठिकाना नहीं .व्यक्तिगत जीवन नरक बन जाता हैं .

तीसरा धार्मिक दृष्टि से भी कोई भी धरम शराब को मान्यता नहीं देता उसका मुख्य कारण यह तामसिक माना जाता हैं और अनेकों जीवों की हत्या कर शराब बनायीं जाती हैं ,और यदि आप शराब बनते देख ले टी जिंदगी में कभी शराब न पिएंगे .
भारत के हर हिस्से में शराब का सेवन किया जाता है। यह इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि नये साल पर तो भारत में लिकर की रिकॉर्ड बिक्री तक हो गई। शराब पीने वाले अपने मन को किसी ना किसी बात से समझा लेते हैं, जिसमें से एक शराब की लिमिट से जुड़ा है।

अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि दो-तीन पेग लगाने से कोई नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि शरीर को फायदा ही होता है। ऐसा दावा कई शोध में भी किया जा चुका है। लेकिन डब्ल्यूएचओने ऐसे लोगों को चौंकाने वाला खुलासा किया है। संगठन ने कहा कि, शराब पीने की कोई सेफ लिमिट नहीं है और इसकी एक बूंद भी ७ प्रकार के कैंसर बना सकती है।

१ बूंद से हो सकते हैं ७ कैंसर

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, एल्कोहॉल (शराब) एक विषाक्त पदार्थ है, जिसे कैंसर पैदा करने वाले तत्वों के ग्रुप १ में रखा गया है। अगर आप शराब की एक बूंद भी पीते हैं, तो ७ तरह के कैंसर हो सकते हैं। इस लिस्ट में मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, इसोफेगस कैंसर, लिवर कैंसर, वॉइस बॉक्स का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और फीमेल ब्रेस्ट कैंसर शामिल हैं।

महिलाओं के इस अंग में होता है कैंसर

एल्कोहॉल और कैंसर पर डब्ल्यूएचओ की फैक्टशीट के मुताबिक, शराब पीने से होने वाला मुख्य कैंसर पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग होता है। २०१८ में डब्ल्यूएचओ यूरोपियन रिजन में शराब पीने से महिलाओं के ब्रेस्ट को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा और अधिकतर ब्रेस्ट कैंसर के मामले देखने को मिले।

पुरुषों को लिवर कैंसर नहीं, इसका अधिक खतरा

शराब से होने वाले कैंसर में सबसे पहले लिवर कैंसर का नाम याद आता है। लेकिन डब्ल्यूएचओ फैक्टशीट कहती है कि २०१८ में यूरोपियन रिजन में शराब पीने से पुरुषों को सबसे ज्यादा आंतों और मलाशय का कैंसर होता है।

शराब के साथ कभी ना करें धूम्रपान

अगर आप शराब के साथ धूम्रपान भी करते हैं, तो सुधर जाइए। क्योंकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि जो लोग शराब के अलावा धूम्रपान भी करते हैं, उन्हें कैंसर होने का खतरा 5 गुना अधिक होता है। वहीं, हैवी ड्रिंक करने पर यह खतरा ३० गुना हो जाता है।

डब्ल्यूएचओ ने बताए जरूरी कदम

शराब के कारण होने वाले कैंसर की रोकथाम के लिए डब्ल्यूएचओ कुछ जरूरी कदम उठाने की सलाह देता है। जिसमें शराब की कीमत बढ़ाना, सभी मीडिया सोर्स पर मार्केटिंग बंद करना, शराब की उपलब्धता कम करना आदि शामिल हैं। लेकिन बता दें कि सबसे जरूरी और असरदार उपाय सेल्फ कंट्रोल है।

यह मिथ्या धारणा हैं की कम मात्रा में या सीमित या अच्छी गुणवत्ता वाली और महंगी हानिकारक नहीं होती .यह जहर हैं और जहर कभी अमृत नहीं बन सकता .

-विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद्

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