प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का 71 वां अंतर विलय समाधि वर्ष श्रद्धाभक्ति धार्मिक अनुष्ठान पूर्वक मनाया

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प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का 71 वां अंतर विलय समाधि वर्ष श्रद्धाभक्ति धार्मिक अनुष्ठान पूर्वक मनाया । आचार्य श्री अध्यात्मिक उद्योगपति होकर चारित्र के चक्रवती रहे आचार्य श्री वर्धमान सागर 20वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का 71 वा अंतर्विलय समाधि दिवस 12 सितंबर भाद्रपद सुदी 2 को वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के संघ सानिध्य में बड़े ही धूमधाम से पार्श्वनाथ भवन दंग की नसिया मे मनाया गया सुबह 6:30 बजे प्रभात फेरी *पार्श्वनाथ भवन दंग की नसियां से नया मन्दिर कोतवाली रोड होते हुए दीवान जी की नसिया बावड़ी गेट होते हुए बड़ा मंदिर और बड़ा मंदिर से पार्श्वनाथ भवन दंग की नसियां में समापन हुआ आचार्य वर्धमान सागर धर्म वात्सल्य वर्षा योग समिति , दिगंबर जैन बड़ा मंदिर बीस पंथ आमनाय प्रबंध समिति सीकर सकल दिगंबर जैन समाज सीकर केअनुभव सेठी,आशीष जयपुरिया ने बताया कि श्री धर्म सागर जी सभागृह में आचार्य शांति सागर जी की प्रतिमा का अभिषेक पश्चात आचार्य शांति सागर विधान की पूजन भक्ति भावपूर्वक श्रद्धालुओं ने की। आचार्य श्री शांति सागर जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रवज्जलन अतिथियों ने किया नृत्य मंगलाचरण के बाद भावांजलि में श्री धर्मचंद गुरु जी ने गुणानुवाद में अनेक संस्मरण आदर्श और धर्म प्रभावना के प्रतीक बताए। डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में बताया कि आचार्य श्री शांति सागर जी का जीवन आदर्श जीवन रहा वह वर्तमान श्रमण परंपरा के जनक एवं प्रथमाचार्य रहे उनके समय अनेक मुनि थे किंतु आचार्य नहीं थे। आचार्य शांति सागर जी अपने जीवन में समय सार से ज्यादा महत्वपूर्ण महाबंध स्वाध्याय को प्रतिपादित करते थे क्योंकि कर्मबंध से ही समाज ग्रसित है।आचार्य शांति सागर जी जीवन में कभी डरे ,रुके , झुके नहीं । वह अध्यात्मिक उद्योगपति थे चारित्र के चक्रवर्ती थे उनके समान तपस्वी ,धर्म प्रभावक स्वाध्याय प्रेमी कोई संत नहीं हुआ। आचार्य श्री ने जीवन में 9938 उपवास पकिये उनके ऊपर अनेक बार सर्प ,सिंह ,चींटी ,मकोड़े के उपसर्ग हुए जिन्हें समता पूर्वक सहन किया। इस अवसर पर दंग की नसिया में आचार्य श्री के संयमी जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में हुआ। शाम को श्रीजी की आरती पश्चात आचार्य श्री की महाआरती ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम में हजारों समाज जनों की उपस्थिति रही।

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