निजात्म का चिंतन कैसे करें: आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज

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गुवाहाटी :  फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में विराजित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने आज (बुधवार) को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा की जो जिनेंद्र भगवान आज्ञअनुसार संसार के पदार्था मे अपने मन को संभाल लेता है वही जीव इस संसार में आत्मानुभी है। और जो चित्त को विक्षोभ उत्पन्न करता है जिसका मन संक्लिलेशित होता है वह आत्मा के स्वरूप का चिंतन का अभ्यास नहीं कर सकता है। लेकिन अंदर विक्षोभ चित्त का अभाव हो गया है वही आत्मा का अभ्यास कर सकता है। आचार्य श्री ने कहा की जिसके अंदर चित्त की चंचलता कम हो गई है। जिसके मन में स्थिरता आ गई है उसके मन में कोई क्षोभ , छल कामना- वासना, दुख नहीं है, वही इस संसार को कम कर रहा है। अगर मन को क्षोभ रहित करना है तो हमें वास में चित्त को नहीं जाने देना है। और मन में क्रोध,छल को वसा रखा है तो हमारे मन में क्षोभ जरूर उत्पन्न होगा। जिन कारणों से मन में दुख हो रहा है उन कष्ट को समाप्त करो। उन्होंने कहा कि संसार में दो प्रकार के जीव है पहले कार्य को करने वाला दूसरा कारण को पैदा करने वाला।  पहले वो जिन्हें संसार में सब कुछ मिला लेकिन अपने को नहीं पाया। दूसरा वो जिन्हें संसार के अंदर रहते हुए भी अपने को पा लिया है वही जीव अभ्यास  कर सकते हैं। प्रचार प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी  ने बताया कि इस अवसर पर काफी संख्या में गुरु भक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित।।

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