मुनिश्री विनम्र सागरजी का पहली बार दिल्ली में लाल मंदिर आगमन पर स्वागत

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मुनिश्री विनम्र सागरजी का पहली बार दिल्ली में लाल मंदिर आगमन पर स्वागत

नई दिल्लीः आचार्य श्री विद्यासागरजी और समयसागरजी के प्रमुख शिष्य मुनिश्री विनम्र सागरजी का 12 जुलाई को पहली बार राजधानी आगमन पर श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर चांदनी चौंक में भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने मुनि श्री को श्रीफल भेंटकर विनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह राजधानी का सौभाग्य है कि परम तपस्वी आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य यहां पधारे। यह हम सबके लिए मंगलकारी होगा। संघ में मुनि श्री निस्वार्थ
और निसर्ग सागरजी भी हैं। संघ की भव्य शोभायात्रा दिल्ली गेट से दरियागंज होते हुए यहां पहुंची। मुनि श्री ने कहा कि अहिंसा ही सबसे बडा और सर्व मान्य धर्म है, यह हमारी पहचान है, धर्म के सौंदर्य को बढाना जरूरी है। संयम, तप, ज्ञान, पूजा, कुल, जाति का विस्तार बहुत जरूरी है। हमारे जीवन में एक-एक दिन हीरे के समान है, इसका सदुपयोग करना है। आयु नित्य घटती जा रही है, जबकि पाप मति बढती जा रही है। चाहे छोटा सा संयम ही क्यों न हो उससे बिमारियां दूर होती हैं। मुनि श्री ने आचार्य श्री शांति सागरजी का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि उन्होने लगभग सौ साल पहले यहां राजधानी में लालकिले के सामने आकर और फोटो खिंचवाकर दिगंबरत्व को शाश्वत पहचान दी थी। समाज को उनका उपकारी होना चाहिए। मुनि श्री ने हथकरघा अपनाने की भी अपील की। यहां मंदिर प्रांगण में हथकरघा केंद्र भी खोला गया।
13 जुलाई को मुनि श्री ने प्रातःकाल चांदनी चौंक के सभी अतिशय पूर्ण 7-8 मंदिरों के दर्शन किए और अपार हर्ष प्रकट किया। समारोह में निगम पार्षद सुमन गुप्ता, पंकज जैन, लाल मंदिर के मैनेजर पुनीत जैन, नीरज जैन, एनसी जैन-माडल टाउन, सुधीर जैन जौहरी, रमेश जैन एडवोकेट नवभारत टाइम्स, ललित जैन, अतुल जैन, जिनेंद्र जैन, नरेंद्र जैन दरियागंज आदि भी उपस्थित थे। मुनि श्री यहां से सिविल लाइंस के लिए विहार कर गए। उनका चातुर्मास प्रशांत विहार में 2 अगस्त को होगा। समारोह जापानी पार्क रोहिणी में होगा।
रमेश चंद्र जैन एडवोकेट नवभारत टाइम्स नई दिल्ली

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