माता के गर्भ में आने पर ही बच्चों को उत्पन्न होते हैं धर्म के संस्कार

0
26

माता के गर्भ में आने पर ही बच्चों को उत्पन्न होते हैं धर्म के संस्कार
दिगंबर संत योग सागर महाराज
16 मई शनिवार 2026 प्रातः काल 8:30 पर
जिला बूंदी के देवपुरा दिगंबर जैन जिनालय में धर्म सभा को संबोधित करते हुए जैन संत ने बताया
माता के गर्भ में जीव उत्पन्न होने पर ही धर्म के संस्कार आना प्रारंभ हो जाते हैं वह जीव जन्म होने पर ही धर्म की क्रियाओं को देखकर उनकी ओर लालायित होता है
धर्म सभा में एक छोटे से बालक दक्ष जैन जो अभी मात्र 18 माह का है अपनी माता के साथ जिनालय में मुनि के चरणों में आकर माइक पर मुनि के जज कारों के उच्चारण किया छोटे से बालक को मुनि ने अपना आशीष दिया
यह छोटा सा बालक मुनि भक्त पुष्पांशी जैन का है जिन्होंने मुनि सेवा संतो को आहार विधान कराने में अपना जिले में नाम कमाया है
संतो के सानिध्य में संभवनाथ पाठशाला का शुभारंभ हुआ
संत ने यह भी बताया की जो माताएं गर्भ के समय धर्म की क्रियाएं अभिषेक शांति धारा साधुओं को आहार देती है निश्चित रूप से उनकी कोख में पलने वाला जीव बहुत ही धर्मात्मा होगा
वह जीव उत्पन्न होने के बाद अपने माता-पिता व स्वयं की अलग ही पहचान बनाता है
धर्म सभा में मंगलाचरण की प्रस्तुति मुनि भक्त ने बताया कि संत आने पर प्रकृति अपना वातावरण धर्म मय बनाती है संत आने पर धर्म धर्म की प्रभावना अधिक होती है नगर में उत्सव जैसा वातावरण देवपुरा में देखने को मिला
संत यह भी बताया कि माताएं सदैव ही बच्चों को अपने साथ जिनालय लेकर आवे जिससे वह जिनालय वह धर्म को जान सके दिगंबर साधुओं को पहचान सके
अपार भक्तों ने धर्म सभा में पहुंचकर मुनि का आशीष प्रवचन का लाभ प्राप्त किया
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here