जब एक पति ने विश्वास दिया और एक पत्नी ने इतिहास रच दिया
74 वर्ष की प्रेरक जीवन-यात्रा को नमन, हीरक जयंती वर्ष में प्रवेश पर हार्दिक शुभकामनाएँ
आज भोपाल प्रवास में एक ऐसे व्यक्तित्व के सान्निध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिनका जीवन स्वयं में एक प्रेरक ग्रंथ है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आदरणीया विमला जी जैन एवं श्रद्धेय सुरेश जी जैन (IAS) का स्नेह, आशीर्वाद और आत्मीय मार्गदर्शन प्राप्त कर मन श्रद्धा और प्रेरणा से भर उठा।
यह अवसर और भी विशेष था क्योंकि आदरणीया विमला जी आज अपने जीवन के 74 वर्ष पूर्ण कर हीरक जयंती वर्ष में प्रवेश कर रही हैं।
हमारे समाज में सफल लोगों की अनेक कहानियाँ मिलती हैं, किंतु कुछ जीवन ऐसे होते हैं जो स्वयं एक संदेश बन जाते हैं। विमला जी का जीवन ऐसी ही एक प्रेरक गाथा है। विवाह के समय वे मात्र हाई स्कूल उत्तीर्ण थीं। गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियाँ, छोटे बच्चों का पालन-पोषण और सामाजिक दायित्व—इन सबके बीच शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि यही महिला एक दिन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायासन को सुशोभित करेगी।
किन्तु जहाँ संकल्प हो, पुरुषार्थ हो और जीवनसाथी का विश्वास साथ खड़ा हो, वहाँ असंभव भी मार्ग दे देता है। श्रद्धेय सुरेश जी जैन ने अपनी जीवनसंगिनी की प्रतिभा पर विश्वास किया, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उस विश्वास को विमला जी ने अथक परिश्रम, अध्ययन, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर उपलब्धियों के शिखर तक पहुँचाकर सार्थक कर दिया।
हाई स्कूल से उच्च न्यायालय तक की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है; यह उस पारिवारिक संस्कृति की विजय है जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के सपनों के सहयात्री बनते हैं। यह कहानी बताती है कि जब घर में प्रोत्साहन का वातावरण हो तो प्रतिभा अपने लिए आकाश स्वयं खोज लेती है।
न्यायिक सेवा के उच्चतम दायित्वों का निर्वहन करने के बाद भी विमला जी का जीवन सक्रियता, सृजनशीलता और समाज-समर्पण का पर्याय बना हुआ है। वे आज भी लेखन, अध्ययन और चिंतन में निरंतर रत रहती हैं। धर्म एवं विशेष रूप से श्री नैनागिरि सिद्धक्षेत्र के प्रति उनका एवं सुरेश जी का समर्पण अनुकरणीय है।
आज उनके सान्निध्य में बैठकर सहज ही यह अनुभूति हुई कि पद व्यक्ति को प्रतिष्ठा दे सकता है, पर व्यक्तित्व को ऊँचाई उसके संस्कार, संघर्ष, संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण ही प्रदान करते हैं। न्यायमूर्ति का पद एक उपलब्धि है, किंतु प्रेरणा बन जाना उससे कहीं बड़ी उपलब्धि है।
आदरणीया विमला जी का जीवन आज की पीढ़ी, विशेष रूप से बेटियों और महिलाओं के लिए यह संदेश देता है कि सीखने की कोई आयु नहीं होती, सपनों की कोई सीमा नहीं होती और दृढ़ निश्चय के सामने परिस्थितियाँ भी अंततः झुक जाती हैं।
हीरक जयंती वर्ष में प्रवेश के इस शुभ अवसर पर आदरणीया विमला जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगलकामनाएँ। प्रभु से प्रार्थना है कि वे स्वस्थ, सक्रिय, यशस्वी एवं दीर्घायु रहें तथा अपने अनुभव, विचार और प्रेरक जीवन से समाज को निरंतर आलोकित करती रहें।
आपका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि विश्वास से प्रारंभ हुई यात्रा इतिहास बन सकती है।
सादर नमन एवं शुभकामनाएँ।
राजेन्द्र महावीर जैन
सनावद












