इस वार नौतपा 25 मई से 02 जून तक तपेगा

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इस वार नौतपा 25 मई से 02 जून तक तपेगा
उसके बाद भी गर्मी और लू का कहर ज्यादा रहेगा

मुरैना (मनोज जैन नायक) “नौतपा” वह समय माना जाता है जब सूर्य अत्यंत प्रखर ताप देता है। यह सामान्यतः नौ दिनों का होता हैं । इसलिए इसे नौ तपा नाम दिया गया है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में अच्छी गर्मी पड़े तो आगे वर्षा सामान्य और सामान्य से अच्छी होती है।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि ज्योतिष अनुसार वृष राशि में रहते रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से नौ तपा प्रारम्भ होता है।
वृषभ राशि में अर्थात जब सूर्य वृषभ राशि के 10°00′ से 23°20′ अंश तक रहता है, तब वह रोहिणी नक्षत्र में होता है। इस तरह सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 14 दिन रहता है । लेकिन
परंपरागत रूप से सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के बाद के प्रथम 9 दिन “नौतपा” कहलाते हैं। सामान्यतः यह समय 25 मई से प्रारम्भ होकर 02 जून के आसपास समाप्त होता है।
ज्योतिषीय अनुसार रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना गया है। जब अग्नितत्त्व प्रधान सूर्य यहाँ आता है तो उसकी ऊष्मा प्रभावशाली मानी जाती है।
पृथ्वी की स्थिति इस समय सूर्य उत्तरायण में ऊँचाई पर होता है, जिससे दिन बड़े होते हैं, सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक सीधी पड़ती हैं इससे भूमि का तापमान तेजी से बढ़ता है।
इस तरह नौतपा जितना “तपेगा”, उतनी ही समुद्री वाष्पीकरण प्रक्रिया मजबूत होगी, जिससे आगे चलकर मानसून अच्छा बनता है।
इसलिए कहा जाता है:
“रोहिणी तपे, मृगशिरा बरसे”
अर्थात रोहिणी में अच्छी गर्मी पड़े तो आगे वर्षा अच्छी होती है। नौतपा काल में लू एवं अग्नि तत्व प्रबल रहता है, जल तत्व कमजोर माना जाता है । इस लिए इन दिनों में भयंकर लू चलती है । दिन में 12 से 03 बजे का समय लू और तपन से घर से बाहर निकलने में मुश्किल भरा रहता है।
इसलिए इस समय पशु पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था प्याऊ लगवाना सर्वाधिक पुण्य का काम है।
इस बार आंधी तूफान वर्षा का जोर नौतपा और उसके बाद भी बनेगा
जैन ने बताया कि इस बार दो ज्येष्ठ माह पड़ने से दोनों ज्येष्ठ माह में गर्मी के बीच आंधी तूफान वर्षा बीच बीच में आती रहेगी। 01 जून से द्वितीय ज्येष्ठ माह सोमवार से प्रारंभ होने और द्वितीय ज्येष्ठ माह में पांच सोमवार पड़ने से 02 जून को बुध के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश और 08 जून को शुक्र के कर्क राशि में प्रवेश से वर्षा आषाढ़ माह की जगह द्वितीय ज्येष्ठ माह में ही वर्षा मानसून चाल सक्रिय रहेंगी। लेकिन गर्मी उमस कम नहीं होगी। और नौ तपा के बाद भी द्वितीय ज्येष्ठ माह होने से लू, गर्मी का कहर बना रहेगा ।

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