गीत-संगीत का धर्म य मजहब से कोई संबंध नहीं है.. लेकिन संगीत इन्सान को ईश्वर से जोड़ने में कारण जरूर बन सकता है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/ नरेंद्र पियुष जैन आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ सोनकच्छ पुष्पगिरी में वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्योंकम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि जब कोई भक्त परमात्मा की प्रार्थना करता है और ध्वनि के रूप में आलाप भरता है, तब चाहे वह अल्लाह हो, जीसस, शिव शंकर, राम, महावीर, हनुमान हो – सभी की प्रार्थना में विचार और विकार शून्य अनहद नाद का अनुभव होता है। यही ध्यान का प्रथम चरण है।
संगीत की स्वर-लहरियों में निहित गंभीरता, ध्यानमय नाद, विचार-शून्य आलाप और आध्यात्मिक तरंगें सदियों से भारतीय संस्कृति की पहचान और आनंद का अभिन्न अंग रही है। इसलिए कहा जाता है कि हमारे मूल स्वभाव में ही ध्यान और साधना का संगीत बसता है ।
जब हम किसी राग को गहरी श्वास के साथ साधते हैं, तब वह केवल सुरों का विस्तार नहीं होता, बल्कि भीतर की शांति और विचार-विकारों से मुक्ति की खोज का माध्यम भी बन जाता है।
ओमकार की गहन ध्वनि ही ईश्वर के स्वरूप का प्रतीक है और वही आनंद और शान्ति का धाम है। आज की भाग-दौड़ भरी और तनावग्रस्त ज़िंदगी में मन का भटकाव अत्यंत तीव्र हो गया है। ऐसे में उस भटकाव को रोकने का एक प्रभावी माध्यम संगीत बन सकता है। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की भीतर की यात्रा का पाथेय भी है। यदि हम इसे खुले मन से अपनायें, तो मन की शान्ति, अनुशासन, ऊँचाई, और मन की सकारात्मक सोच में बहुत बड़ा परिवर्तन आ सकता है।
संगीत की कोई धार्मिक सीमा नहीं होती, इसलिए हमारे मन के नाद, राग, और भक्ति के आलाप हमारे जीवन को बेहतर बना सकते हैं । हमने बचपन से सुना, सीखा और यही जाना कि संगीत साधना है, और साधना का लक्ष्य ईश्वर से तादात्म्य स्थापित करना है।
जिन्हें संगीत से प्रेम नहीं है या जो उसके रस का अनुभव नहीं कर पाए हैं, वे उसके महत्व को सहजता से नहीं समझ सकते। ऐसे लोगों के लिए “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद” वाली कहावत चरितार्थ होती है…!!! ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी सोनकच्छ नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है
Regards,
Piyush Kasliwal
9860668168














