देव-शास्त्र-गुरु के दर्शन भक्ति करने के अर्जित पुण्य से सारे कार्य सफल होते हैं…..आर्यिका विलोकमति माताजी

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देव-शास्त्र-गुरु के दर्शन भक्ति करने के अर्जित पुण्य से सारे कार्य सफल होते हैं…..आर्यिका विलोकमति माताजी
मुनि श्री चिंतन सागर जी ने किये केशलोचन
सीकर (    ) भगवान एवं संत के दर्शन करने से ताप,पाप और अभिशाप समाप्त हो जाते हैं। दान देने से हाथ धन्य हो जाता है । कंठ से प्रभु भक्ति करने से पाप नष्ट होते हैं।देव-शास्त्र-गुरु के दर्शन भक्ति प्रतिदिन करना चाहिए  श्रावक को सभी क्रियाएं श्रद्धा,विवेक पूर्वक करना चाहिए जैसे आपके परिणाम भाव रहेंगे वैसे पुण्य या पाप मिलेगा। हाथ की शोभा भगवान के दर्शन,अभिषेक,पूजन दान देने से पैरो,चरणों की शोभा मंदिर गुरु के दर्शन करने से,धन की शोभा दान देने से,कान की शोभा जिनवाणी धर्मवाणी सुनने से,आंखों की शोभा परमात्मा के दर्शन करने से,मुंह की शोभा प्रभु भक्ति करने से,जीभ की शोभा अच्छे वचन बोलने से एवं देव-शास्त्र-गुरु के दर्शन,भक्ति करने से अर्जित पुण्य से सारे कार्य सफल होते हैं। यह प्रवचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की शिष्या आर्यिका विलोकमति माताजी ने आचार्य श्री धर्मसागर सभागार सीकर में आयोजित धर्मसभा में प्रगट किए ।
मीडिया प्रभारी डॉ.राजेश पंचोलिया के अनुसार पूज्य माताजी ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद करके बताया कि वह सभी पूर्व आचार्यो की भक्ति कैसे करते हैं यह देखना चाहिए। आचार्य श्री पूर्वाचार्यों की समाधि दिवस पर उपवास करते हैं। अक्सर एक दिन पूर्व नीरस आहार लेते हैं।
सीकर में  प्रवास के दौरान  मुनि श्री चिंतन सागर जी ने केशलोचन किया । केशलोचन के बारे में संघ के मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर  साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है । केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केशलोचन  के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केश लोचन की प्रक्रिया में मुनि श्री ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता ,जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु  अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है । डा.राजेश पंचोलिया  के अनुसार मुनि श्री ने बताया कि  केशलोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय  तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं ।केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर पर अनेक समाज जन  उपस्थित रहे। अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना की।

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