दसलक्षण पर्व के उत्तम क्षमा दिवस पर भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन
गुरुग्राम, 16 सितंबर। पालम विहार स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, महावीरोदय धर्मस्थल में दसलक्षण पर्व श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। दसलक्षण पर्व के प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म के अवसर पर मंदिर परिसर में दिनभर विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान जिनेंद्र की आराधना की और धर्मलाभ प्राप्त किया।
पर्व के अंतर्गत प्रातःकाल मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच भगवान श्री जी का भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ हुए इस धार्मिक आयोजन में समाज के अनेक परिवारों ने सहभागिता की। अभिषेक एवं शांतिधारा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर परिवार एवं समाज के सुख, शांति और मंगल की कामना की।
सामूहिक आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह
सायंकाल मंदिर परिसर में श्री जी की सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए। सामूहिक रूप से आरती एवं भक्ति कार्यक्रम में महिला, पुरुष, युवा एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण से गूंज उठा।
आरती के पश्चात् शास्त्री जी अक्षत जैन, सांगानेर श्रमण संस्कृति ने उत्तम क्षमा धर्म विषय पर प्रभावशाली एवं सारगर्भित प्रवचन दिए। उन्होंने क्षमा को जैन धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक मूल्यों में से एक बताते हुए इसके वास्तविक स्वरूप एवं जीवन में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि क्षमा केवल किसी से क्षमा मांगने या किसी को क्षमा कर देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन में उत्पन्न होने वाले क्रोध, अहंकार, द्वेष और वैमनस्य को दूर करने की साधना है। उत्तम क्षमा व्यक्ति को आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ाती है और पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में प्रेम, सौहार्द एवं सद्भाव को मजबूत करती है।
महासती चेलना एवं राजा श्रेणिक के प्रसंग का हुआ मंचन
धार्मिक प्रवचन के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महासती चेलना एवं राजा श्रेणिक के प्रेरणादायी प्रसंग पर आधारित नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से जैन धर्म के आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मंचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, क्षमा, त्याग, संस्कार और आत्मकल्याण जैसे महत्वपूर्ण संदेशों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और प्रस्तुति को सराहा।
सकल जैन समाज, पालम विहार के सामूहिक सहयोग से आयोजित यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा और सामाजिक एकता का विशेष अवसर बना।














