बालक वीयू जैन ने स्वीकार किए जैनत्व के सिद्धांत
मुरैना (मनोज जैन नायक) जैन धर्म एक सैद्धांतिक धर्म है। जैन धर्म के अपने नियम और सिद्धांत हैं। यदि कोई व्यक्ति जैन कुल में पैदा हुआ होकर जैन धर्म के सिद्धांतो का पालन नहीं करता है अथवा जैन धर्म के नियमों को स्वीकार नहीं करता है तो वह जैन कहलाने का हकदार नहीं हैं। जैन दर्शन में बालक के जन्म के 45 दिन बाद उसे जिनालय लाया जाता है । उसे मुनिराज या त्यागीवृति अथवा किसी शास्त्री, पंडितजी द्वारा महामंत्र णमोकार सुनाकर जैनत्व में स्वीकार किया जाता है ।
नगर के वरिष्ठ समाजसेवी, श्रावक श्रेष्ठी एवं अतिशय क्षेत्र टिकटोली के परम शिरोमणि संरक्षक जगदीश प्रसाद जैन एक बोलिया के नाती बालक बीयू जैन सुपुत्र सोनू जैन ने आठ वर्ष की आयु पूर्ण कर जैनत्व को अंगीकार किया । जैन सिद्धांतो के अनुसार आठ वर्ष से छोटे बालकों को श्री जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिमा को स्पर्श करने और अभिषेक आदि करने का निषेध रखा गया है। आठ वर्ष से अधिक उम्र के बालक को ही श्री जिनेन्द्र प्रभु को स्पर्श करने एवं अभिषेक आदि करने की अनुमति प्रदान की गई है। आज बालक वीयू जैन ने भी जैनत्व को स्वीकार किया है, यह क्षण सभी के लिए गौरव की बात है।
इसी संदर्भ में नगर के श्रावक श्रेष्ठी जगदीश प्रसाद जैन जे पी एक बोलिया परिवार में सोनू जैन के सुपुत्र वीयू जैन के साथ एबी रोड हाइवे पर स्थित ज्ञानतीर्थ जिनालय में धार्मिक अनुष्ठान के साथ जैनत्व को स्वीकार किया । सर्व प्रथम बालक बीयू जैन को पूजन के केशरिया धोती दुपट्टे पहनाए गए । सिर पर चांदी का मुकुट एवं हार आदि से सुसज्जित किया गया । विधानाचार्य अभिषेक जैन शास्त्री ने मंत्रोचारण के साथ बीयू जैन से श्री जिनेन्द्र प्रभु के प्रथमबार अभिषेक की क्रिया सम्पन्न कराई । बालक के आठ वर्ष पूर्ण एवं जैनत्व स्वीकारने के अवसर पर श्री शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया । इस अवसर बालक के परिजन, रिश्तेदार, इष्ट मित्र एवं सैकड़ों की संख्या में समाजजन मौजूद थे ।















