अपने मुंह से भाषा को विवेक पूर्वक बोले जिससे घर में विवाद उत्पन्न ना हो

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अपने मुंह से भाषा को विवेक पूर्वक बोले जिससे घर में विवाद उत्पन्न ना हो
प्रवचन केसरी विश्रांत सागर सागर महाराज
टूंडला उत्तर प्रदेश शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास के दौरान
10 सितंबर गुरुवार 2026 को
जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया

जैसे हमने घी की कीमत की है घी को बर्बाद नहीं होने दिया उसी तरह अपने शब्दों को बर्बाद नहीं करना चाहिए सोच समझ कर बोलना चाहिए भाषा शैली का सदुपयोग करना चाहिए क्योंकि शब्दों के कारण ही घरों में विवाद होते हैं
मधुर भाषा बोलने पर परिवार संगठित रहता है विवाद उत्पन्न नहीं होता सभी लोग प्यार से रहते हैं और बोलने वाले से बहुत प्यार करते हैं
यह मधुर भाषा का बहुत बड़ा गुण जैन संत ने बताया

, गुरु देव ने आगे कहां है कि कोयल और काक(कौआ) की पहचान वर्ण से नहीं वाणी से होती है, इसलिए अपनी वाणी को संभाल कर बोलना चाहिए वाणी वीणा का काम करे बाण का नहीं,आगे गुरु देव ने कहा है कि दुर्जन और आग एक जैसे होते हैं दूसरों को शुद्ध करते हैं और स्वयं राख हो जाते हैं
प्रवचन परम पूज्य प्रवचन केसरी धर्म चक्रवर्ती मुनि विश्रांत सागर महाराज ने बताया जो मेरी भक्त प्रशंसा करता है उनका आशीर्वाद है जो भक्त निंदा करता है उनको महा आशीर्वाद है
जो भक्त प्रदूषण पर्व में 10 दिनों तक पानी के एक बूंद नहीं पीते
ऐसे पापी लोग भी हैं जो पानी न छोड़कर भोजन तक रात्रि में ग्रहण करते हैं उनका जैन कुल में जन्म होना नहीं के बराबर है ऐसे व्यक्ति जैन कललाने के अधिकारी भी नहीं है
धर्मसभा में छोटी सी 3 वर्ष की बालिका ने महाराज की माइक पर आरती भी की यह बालिका का बहुत बड़ा सौभाग्य मुनि ने बताया इन संस्कारों से ही परिवार की धर्म की पहचान बनती है
अपार भक्तों ने मुनि के प्रवचन का लाभ प्राप्त कर जय जयकार जिनालय मे की
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

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