ऐसा जीवन जिएँ कि आपको देखकर दूसरों का मन भी धर्म की ओर ललचा जाए
श्रमण संस्कृति के महाश्रमण, तीर्थंकर सम उपकारी मुनिश्री
सुधा सागर जी महाराज नेआज गुरुवार को दलाल बाग स्थित विद्या सुधा देशना मंडप में चातुर्मासिक धर्म सभा मे जीवन की दिशा और दशा बदलने वाला प्रवचन देते हुए धर्म, साधना, त्याग, आत्मबल और जीवन की सार्थकता का अत्यंत गहन संदेश दिया।
महाराज श्री ने कहा कि धार्मिक जीवन की वास्तविक सफलता केवल स्वयं पूजा, अभिषेक, व्रत या त्याग करने में नहीं है, बल्कि हमारे आचरण को देखकर दूसरे व्यक्ति के भीतर भी धर्म और अच्छे जीवन की इच्छा जागृत हो यही सच्ची प्रभावना है। उन्होंने कहा कि ऐसा जीवन जिओ की विरोधी भी कहे कि काश मेरा
जीवन ऐसा होता।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महाराज श्री ने कहा कि अपने जीवन का आचरण ऐसा बनाइए कि आपका विरोधी भी आपको देखकर कहने लगे कि
“काश! मेरा जीवन भी ऐसा होता।”
आपकी पूजा देखकर किसी के भीतर पूजा का भाव जागे, आपके अभिषेक को देखकर किसी का मन भी अभिषेक करने के लिए ललचाए, आपके त्याग को देखकर कोई कहे काश! मैं भी ऐसा त्याग कर पाता।” यही तुम्हारी साधना की वास्तविक सफलता है । मुनि पद की सफलता मुनि चर्या से है।
महाराज श्री ने साधु जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि मुनि की चर्या ऐसी हो कि जो व्यक्ति कभी मुनियों को नहीं मानता था, वह भी मुनिराज की मुस्कान, तेज, विचार, व्यवहार, आहार और विहार से प्रभावित होकर कह उठे कि
मेरे जीवन में भी ऐसा दिन आए, जब मैं भी ऐसा जीवन जी सकूँ।”
मुनि का उठना, बैठना, बोलना, चलना, आहार ग्रहण करना और विहार करना हर चर्या किसी के लिए प्रेरणा बननी चाहिये।
जाति और समाज की चर्चा करते हुए मुनि श्री ने कहा कि
हमें अपने धर्म और समाज पर गर्व होता है, लेकिन जीवन की वास्तविक उपलब्धि तब है जब हमारा समाज भी कहे कि हमें गर्व है कि हमारी जाति और समाज में ऐसे व्यक्ति भी है।
महाराज श्री ने गृहस्थों को भी महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि संतान को केवल संपत्ति नहीं संस्कार, हुनर, जीवन जीने की कला, निर्णय लेने की क्षमता, और आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन दीजिए।
मीडिया मेन राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा में आकाश आलोक जैन नवीन गोधा आनंद गोधा, अशोक डोशी, महामंत्री श्री हर्ष जैन प्रिंसपाल टोंग्या, रमेश जैन निर्वाणा, रितेश पाटनी, योगेंद्र काला,गिरीश जैन गिन्नी भूपेंद्र जैन, अखिलेश सोधिया , स्वदेश जैन गुरुजी,रानी डोसी मुक्ता जैन सहित बड़ी संख्या में समाज श्रेष्ठीउपस्थित थे।












