आदिनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक पर पालकी यात्रा निकाली गई
जैन मंदिर में हुए विभिन्न आयोजन
मुरैना/अम्बाह (मनोज जैन नायक) जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री 108 आदिनाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया।
जैन धर्म के आराध्य प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जन्म कल्याणक पर प्रातःकालीन वेला में श्री जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन के साथ विशेष पूजा अर्चना की गई ।
जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर अम्बाह में श्रावकों द्वारा इन्द्ररूप में केशरीया वस्त्र धारण कर, हार, मुकुटमाला से सुसज्जित इन्द्रों द्वारा श्रीजी की प्रतिमा को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया । भव्य श्रीजी पालकी यात्रा में युवा एवं बच्चे हाथों में पंचरगी ध्वजा लेकर चल रहे थे । बैंड बाजे वाले अपनी मधुर वाद्य यंत्रों से कुंडलपुर में बधाई, मंत्र णमोंकार हमें प्राणो से प्यारा, आदिनाथ भगवान बड़े बाबा मेरे, रंगमा रंगमा रंग गयो रे, के भजन गा रहे थे । श्री जी की भव्य शोभायात्रा नगर के प्रमुख बाजारों से होते हुए वापिस श्री आदिनाथ जिनालय में समाप्त हुई। तत्पश्चात अभिषेक शांतिधारा पूजन हुआ । सभी क्रियाएं आकाश जैन पांडे द्वारा मंत्रोचारण के साथ विधिविधान पूर्वक संपन्न कराई । भव्य एवं विशाल श्रीजी शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित साधर्मी बंधु जिनेन्द्र प्रभु का गुणगान करते हुए चल रहे थे । विभिन्न स्थानों पर भगवान की आरती कर साधर्मी बंधुओं ने शोभायात्रा की अगवानी की । दोपहर में परेड जैन मंदिर में रामकुमार अमित कुमार जैन सीमेंट बाले की ओर से भजनों का कार्यक्रम संपन्न हुआ ।
श्री दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष संतोष जैन सचिव विकास जैन पांडे, मीडिया प्रभारी कपिल जैन ने बताया है कि भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और आदिपुरुष हैं, जिन्होंने वर्तमान असर्पिणी काल में धर्म और सभ्यता की स्थापना की। अयोध्या में जन्मे, राजा नाभि और रानी मरुदेवी के पुत्र ऋषभदेव जी को मोक्ष मार्ग का प्रवर्तक माना जाता है, जिन्होंने कर्मयुग की शुरुआत करते हुए कृषि, विद्या और शिल्प की शिक्षा दी। इनका जन्म अयोध्या में चैत्र कृष्ण नवमी को हुआ था। इनकी माता मरुदेवी और पिता राजा नाभिराय थे। दीक्षा व ज्ञान: सांसारिक भोगों से विरक्त होने पर उन्होंने दीक्षा ली और तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त हुआ। शिक्षा उन्होंने असि, मसि और कृषि के माध्यम से समाज को जीवन जीने की कला सिखाई।















