आचार्य शांति सागर महाराज का समाधि दिवस अपार धर्म प्रभावना से मनाया

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आचार्य शांति सागर महाराज का समाधि दिवस अपार धर्म प्रभावना से मनाया
दिगंबर संतो में प्रथमा चार्य आचार्य शांति सागर महाराज थे
आर्यिका संस्कृति श्री माताजी
नैनवा जिला बूंदी 12 सितंबर शनिवार 2026
शांति वीर धर्म स्थल संस्कृति श्री माताजी के सानिध्य में महान संत आचार्य शांति सागर महाराज का समाधि दिवस मनाया गया
जैन समाज प्रवक्ता महावीर सरावगी ने बताया
इस अवसर पर समाज के सैष्टि में
बाबूलाल जैन बरमुंडा शैलेंद्र जैन मारवाड़ा सतीश सेठी विनोद जैन बनी दिगंबर जैन प्रवक्ता महावीर सरावगी ने बताया
आपका बचपन का नाम सात गोड़ा पाटिल था 25 जुलाई 1872 आषाढ़ शुक्ल विक्रम संवत 1929 जन्म भोज ग्राम जिला कर्नाटक के नाना के घर पर आपका जन्म हुआ था
आपके पिता भीमगोडा पाटिल माता सत्य देवी थी
घर पर माता-पिता को देखकर बचपन से ही आप में धर्म के संस्कार कूट-कूट कर भरे हुए थे
नव वर्ष की अल्पायु में आपकी शादी 6 वर्ष की बालिका से हुई 6 माह बाद बीमारी से पत्नी मृत्यु होने पर इन्हें संसार असार लगा और वैराग्य हो गया
दक्षिण भारत में जैन धर्म को कोई नहीं जानता था अपने धर्म का ज्ञान देकर जैन धर्म का बीजारोपण किया
अपने छुल्लक ऐलक दीक्षा के बाद देवेंद्र कीर्ति महाराज से मुनि दीक्षा धरण की
गुरु माता ने बताया
शांति सागर महाराज ने पूरे भारत में भ्रमण कर जैन धर्म में महावीर के सिद्धांतों को बताया आज उनकी बदौलत से यह दिगंबर साधु देखने को मिल रहे हैं उन्होंने यह भी बताया कि पहले जिनालय में हरिजन जाना चाहते थे शांति सागर महाराज ने उन्हें रोकने के लिए बहुत प्रयास किए थे जब सफलता न मिली तो उन्होंने 1105 दिन तक अन्न आहार त्याग किया
उनके त्याग बलिदान से सरकार द्वारा यह आदेश प्रसारित किया गया कि जैन मंदिरों में हरिजन का प्रवेश नहीं होगा धर्म की सुरक्षा के लिए यह जैन संत ने सत्याग्रह किया था माता ने यह भी बताया कि आज दिगंबर साधु जो दिखाई दे रहे हैं यह सब उनकी बदौलत है उनकी तप साधना कोई कीमत नहीं चुका सकता
सभी भक्तों ने अवतरण दिवस पर श्रद्धांजलि देकर उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली
महावीर कुमार सरावगी
दिगंबर जैन समाज प्रवक्ता

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