सुख-दु:ख, स्वर्ग-नरक की बातें बाद में..पहले यह जानो कि जीना कैसे है..? जीने का सबसे सरल उपाय है — देखो, जानो और जाने दो..! – अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

0
24
औरंगाबाद / अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिक्षा भुमी परतापुर बांसवाड़ा से पुष्पगिरी की और अंतिम चरण में चल रही है उसी श्रुंखला में अपने प्रवचन के माध्यम से उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि  मैं देख रहा हूं — आज का आदमी चलते-फिरते दुःख और चिंताएँ बाहर से बटोरकर अपने साथ ले आता है, जिनसे उसका कोई वास्तविक संबंध भी नहीं होता।  जैसे  –कोई कुछ कह दे, तो वह भीतर से दुःखी हो जाता है।कहीं कोई घटना घट जाए, तो उसमें खो जाता है।बाजार ऊपर-नीचे हो जाये, तो परेशान हो जाता है।आदमी हर घटना को खुद से जोड़ लेता है । यही वजह है कि वह मन की शान्ति, चेहरे की प्रसन्नता को खो देता है। कोई गुस्सा करे, तो वह स्वयं गुस्से में बदल जाता है। किसी रिश्तेदारी में जाए और किसी ने पूछा नहीं, तो रिश्ते अहंकार बन जाते हैं। आदमी हर क्रिया की प्रतिक्रिया में उलझ रहा है।  एक शिष्य अपने गुरू के पास गया । वह बहुत गुस्से में था। गुरू से कहा — लोग मुझे गुस्सा दिलाते हैं, मैं क्या करूं-? गुरु उसे नदी के किनारे ले गए। उन्होंने पानी में तैरते हुए कुछ सूखे पत्तों की ओर इशारा किया। पत्ते बहते जा रहे थे, नदी उन्हें अपने साथ ले जा रही थी। गुरु ने कहा — देखो बेटा, यह पत्ते बहते जा रहे हैं। गुरू ने एक पत्थर उठाया और पानी में डाला, पत्थर मैं-मैं डूब गया। गुरु बोले — देखो बेटा, पत्ता इसलिए बह रहा था क्योंकि वह हल्का था, और पत्थर इसलिए डूब गया क्योंकि वह भारी था। फिर  गुरू ने शिष्य से कहा  — अगर तुम हर बात को अपने भीतर पकड़ कर बैठ जाओगे, तो तुम भी पत्थर की तरह भारी हो जाओगे, और दुःखो के सागर में डूब जाओगे। इसलिए जीवन जीना है तो देखो – जानो और जाने दो। तुम भी पत्ते की तरह हल्के होकर जीवन जीओ।
साक्षी भाव का अर्थ है — देखो – जानो और जाने दो । किसी भी पर-वस्तु में उलझना नहीं। पर-वस्तु को अपना मानना नहीं। यह संसार है, घटनाएं घटेंगी, लोग आएंगे, गुस्सा दिलाएंगे, और अपने ही लोग अपना अपमान भी करेंगे। किन्तु तुम भीतर से शांत रहो।जिस दिन तुम भीतर से शान्त हो जाओगे, उसी दिन से देखो – जानो और जाने दो को आत्मसात कर लोगे। जिस दिन तुम इस बात को आत्मसात कर लोगे, उसी दिन से तुम्हारी जिन्दगी बदल जाएगी, और घर परिवार स्वर्ग हो जाएगा…अंतर्मना-अहिंसा-संस्कार पदयात्रा दिशा-सोनकच्छ, पुष्पगिरी तीर्थ मध्यप्रदेश की ओर बढते गुरु चरण परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी  उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल पद विहार दिनाँक 4 जुलाई 2026, शनिवार, शाम को 4.00 बजे सेंट द्रोण कान्वेंट हाई सेकेण्डरी स्कूल, टोंकखुर्द, जिला-देवास मध्यप्रदेश से चामुंडा इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, देवेली, जिला देवास मध्यप्रदेश 10 किलोमीटर के लिए होगा विशेष आगामी कार्यक्रम 6 जुलाई 2026 सुबह सोनकच्छ जिला-देवास में भव्य मंगल प्रवेश 7 जुलाई 2026 हर मास एक उपवास की मुहिम का कार्यक्रम 9 जुलाई 2026 दोपहर  में पुष्पगिरी में भव्य मंगल प्रवेश होगा ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी सोनकच्छ नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here