मनुष्य पर्याय अमुल्य रत्न है, चिन्तामणि खून के समान है मनुष्य पर्याय प्राप्त करना अत्यंत दुर्लभ है, मनुष्य पर्याय को देव दुनि अर्थात मनुष्य पर्याय को प्राप्त करने के लिए देव व इंद्र भी तरसते है अपन महाभाग्यशाली है कि अपन को मनुष्य प्रर्याय प्राप्त हुआ उक्त उद्गार प-पू विराग कीर्ति उपाध्याय श्री 108 विशेषसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ संत भवन में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा ,
पू .उपाध्याय श्री ने आगे कहा कि भारत भुमी ही ऐसी भुमी है जहाँ तीर्थंकरों का, महापुरुषों व संतों का जन्म होता है, भारत भुमी में भी बुन्देलखण्ड की भुमि वर्तमान में सर्व श्रेष्ठ भूमि है वर्तमान में सबसे अधिक संतों को, त्यागीयों को व विद्वानों को जन्म देने वाली यदि कोई भूमि है तो उसका नाम बुन्देलखण्ड है, आज से 54 वर्ष इसी भूमी में बालक अरुण का जन्म हुआ था जो आज आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी के नाम से जाने जाते हैं, जो आज सम्पूर्ण विश्व में पथरिया का नाम रोशन कर रहे प. पू नगर गौरव गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी गुरुदेव हमेशा कहते थे कि हमारी पहचान माता-पिता से ग्राम-नगर से नहीं बल्कि हमसे हमारे माता-पिता, परिवार व नगर-ग्राम की पहचान होनी चाहिए।
हमे २५ वर्ष पूर्व नगर गौरव आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी महाराज के साथ ऐलक अवस्था में पथरिया आये थे, हमें 5 साल तक आ. श्री के साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ नगर गौरव गणाचार्य श्री विरागसागर जी से हमें दिक्षा प्राप्त हुआ व व आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज से हमें सुशिक्षा व सुसंस्कार प्राप्त हुआ। प्रवचन के पूर्व चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन व पू. आचार्य श्री की पूजन सम्पन्न हुई। उपाध्याय श्री के साथ मंच में नगर गौरव क्षू.श्री 105 विश्वोतीर्णसागर जी, क्षु.श्री 105 विश्वबाहुसागर जी व क्षुल्लिका श्री 105 विजिताश्री माता जी विराजमान थी।
✍️विनोद रोकडे जैन मालेगांव












