जैन समाज आज संत, पंथ और संघ में बट गया है। आप प्रतिदिन णमो लोए सव्ब साहूणम (लोक के सभी साधुओं को नमस्कार) का उच्चारण करते हैं और माला फेरते हैं लेकिन साधु यदि आपकी मान्यताओं का ना हो तो आप उसे नमस्कार नहीं करते और तेरापंथ,बीस पंथ और साधु किस संघ का है के आधार पर साधु को नमस्कार करते हैं। अपने भीतर संत पंथ और
संघ की मान्यताओं से बाहर निकलो और बिना किसी भेदभाव के णमो लोए सव्ब साहूणम के अनुसार सभी पंथों और संघों के साधुओं में भेदभाव
और उनकी उपेक्षा ना करते हुए उन्हें श्रद्धा के साथ नमस्कार करो। संत पंथ और संघ की आपकी मान्यताओं से जिन शासन बदनाम हो रहा है आपकी मान्यताएं आपको पाप में ले जाएंगी।
यह उद्गार आज दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में अपने तीन दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन धर्म सभा को संबोधित
करते हुए श्रुत संवेगी महाश्रमण आदित्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किए।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्म सभा में मुनिश्री ने पुण्य पाप की भी चर्चा की और कहा कि सभी संसारी प्राणी पुण्य के फल की इच्छा करते हैं लेकिन पुण्य कार्य नहीं करते इसी प्रकार पाप का फल भी कोई नहीं चाहता लेकिन पाप सभी करते हैं। रात्रि भोजन, दैनिक जीवन एवं व्यवहार और व्यापार में झूठ, चोरी, हिंसा, कुशील, और परिग्रह,एवं ईर्ष्या, द्वेष और कषाय यह सब पाप की क्रियाएं हैं। इनसे बचना चाहते हो तो जिनवाणी का स्वाध्याय करो जिसका मन स्वाध्याय में लग जाए उसका मन पाप कर्म में नहीं लगेगा। इस अवसर पर रमेश चंद्र जैन एमपीईबी, आलोक जैन नेता, पवन जैन चैलेंजर, डॉ जैनेंद्र जैन, डॉ वी सी जैन, अखिलेश अरविंद सोधिया निलेश जैन उज्वल जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन भूपेंद्र जैन ने किया।
– राजेश जैन दद्दू
इंदौर
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